48 घंटे में ही कैंसर और Leukemia के सेल्स ख़त्म होने शुरू हो जाते हैं रेवन्दचीनी से

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48 घंटे में कैंसर का सफाया…जानिए चमत्कारिक दवा  कैंसर किे मरीजों पर 25 वर्षों के शोध के बाद केलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के मेडिकल फिजिक्स एवं साइकोलॉजी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. हर्डिन बी जॉन्स का कहना है कि कैंसर के इलाज के तौर पर प्रयोग की जाने वाली कीमोथैरेपी कैंसर पीड़ित मरीज को दर्दनाक मौत की तरह ले जा सकती है। ऐसे में वर्तमान में देश और विदेश में कैंसर की प्राकृतिक चिकित्सा बहुत ही ज्यादा प्रचलन में है और ये बहुत ही ज्यादा सस्ती भी है और इसके नतीजे कई गुना अधिक हैं तो आइये जाने Cancer ka natural ilaj.

रेवन्दचीनी (rhubarb) का पौधा

रूबर्ब पौधा जिसे रेवतचीनी और रेवन्दचीनी के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा आयुर्वेदिक दवाइयों में प्रयोग किया जाता है. इस पौधे की पत्तियां ज़हरीली होती हैं लेकिन इसके डंठल दवा के रूप में प्रयोग किये जाते हैं.

हालिया हुए यूएस में एक शोध के अनुसार, रूबर्ब पौधे की डंठलों को कैंसर के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जायेगा. इस शोध में हैरानी भरे परिणाम सामने आए हैं.

Anthraquinone Glycosides नामक केमिकल जो रेवन्दचीनी में पाए जाते हैं ये कैंसर रोधी गुणों से भरपूर हैं, ये व्यक्ति को कैंसर से बचाने और कैंसर को रोकने में काफी सहायक हैं. इसके अलावा इसमें Parietin नामक विशेष Pigment पाया जाता है. इस पौधे की डंठलों में पाए जाने वाले Parietin नामक एक ख़ास ऑरेंज पिगमेंट जो 6PGD नामक एंजाइम को रोक देता है ये एंजाइम कैंसर सेल की ग्रोथ के लिए जरुरी होता है जब इस एंजाइम की कमी कैंसर सेल में होना शुरू हो जाएगी तो कैंसर सेल्स अपने आप ख़तम होना शुरू हो जाएगी. cancer ka ayurvedic ilaj

लेबोरेटरी में किये गये एक शोध में पता लगा है की Parietin पिगमेंट कैंसर के सेल्स को 48 घंटे के अन्दर ही खत्म करने की ताकत रखता है. शोध में इस डंठल का प्रयोग के जरिए दो ही दिनों में लयूकैमिया के आधे से ज्यादा सेल्स को यह पौधा नष्ट कर चुका था.

जॉर्जिया की विनशिप कैंसर इंस्टीट्यूट और एमोरी यूनिवर्सिटी द्वारा 2000 कॉम्पोनेन्ट के साथ इसका परिक्षण किया गया. जिसमें विज्ञानिकों ने पारीटिन पाया. जो एंटी-कैंसर ड्रग के रूप में जाना जाता है.

शोध में चूहों पर 11 दिनों पारीटिन का प्रयोग कर पाया की यह फेफड़ों के कैंसर में कारगर है. इसके साथ ही यह ब्रेन और गर्दन के ट्यूमर को भी ख़त्म कर सकता है.

शोध टीम का कहना है कि इस पौधे जिसे एक प्रकार का फल भी कहा जाता है के आधार पर कैंसर को ख़त्म करने के लिए नई दवाओं को बनाने में सहयोग मिलेगा. इसके परिणाम कीमोथेरेपी की तरह आने वाले सालों में इजात कर लिए जाएंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि पारीटिन का प्रयोग फफूंदी रोधक के रूप में किया जा चुका है लेकिन दवाओं के रूप में इसका प्रयोग इस अध्ययन के बाद किया जायेगा.

विभिन्न भाषाओँ में रेवंद चीनी के नाम.

आयुर्वेदिक में रेवन्दचीनी की सेवन विधि.

साधारण बिमारियों में रेवन्दचीनी को अल्प मात्रा में 60 से 250 मिलीग्राम दिया जाता है. और अधिक भयंकर बीमारी में इसकी मात्रा 1 से 2 ग्राम तक हो सकती है. रोगी की बीमारी देख कर खुद से इसकी मात्रा निर्धारण करें. इसके सेवन से 6 से 8 घंटे में दस्त हो सकता है. अगर दस्त ज्यादा हो तो फिर इसकी मात्रा कम कर दें. मगर इसमें ग्राही तत्व होने के कारण दस्त भी अपने आप बाद में रुक जाता है. अगर मरोड़ हो तो 2 ग्राम सौंठ या 1 चम्मच अदरक के रस के साथ में एक चम्मच सौंफ देने से मरोड़ रुक जाते हैं. इसके सेवन से पेशाब भी गहरे रंग का हो जाता है.

रेवंद चीनी आयुर्वेद की बहुत प्रसिद्ध औषिधि है, यह पहाड़ी इलाकों में उत्पन्न होती है, जैसे शिमला, कश्मीर, हरिद्वार इत्यादि. ये आपको बहुत आसानी से पंसारी से मिल जाएगी.

रेवंद चीनी की असली नकली पहचान.

कई बार कुछ लोग रेवंद चीनी के नाम पर कुछ और चीजें दे देते हैं, ऐसे में आप इसको बड़ी आसानी से पहचान से सकते हैं. इसका स्वाद तीखा और कड़वा होता है, इसमें विशेष गंध रहती है, इसमें Calcium Oxalate होता है जिसको चबाने से करकरापन महसूस होगा. इसको चबाने से मुंह की लार पीले रंग की हो जाती है.

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