12 साल तक बिजली के बिल से आजादी! आया नया डिवाइस

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भारत में जन्‍मे अरबपति उद्यमी और समाजसेवी मनोज भार्गव ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक इवेंट के दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म- बिलियन्स इन चेंज 2 में दिखाए गए नए अविष्कारों का लाइव डेमो दिखाया.

बिलियन्‍स इन चेंज 2 इस तरह की आई पहली डॉक्‍यूमेंट्री की अगली कड़ी है और इसमें पूरी तरह से नए पांच आविष्‍कारों की जानकारी दी गई है जो कि बुनियादी जरूरतों का सीधा समाधान करते हैं.

इवेंट के दौरान भार्गव ने पोर्टेबल सोलर डिवाइस हंस 300 पावरपैक और हंस सोलर को भारतीय बाजार में उतारने की जानकारी दी. हंस पावरपैक डिवाइस न सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी का प्रोडक्शन करता है बल्कि ये इलेक्ट्रिसिटी स्टोर भी करता है. इसी तरह हंस सोलर ब्रिफकेस एक तरह का सोलर पावर स्टेशन है. भार्गव के दावे के मुताबिक इससे भारी तादाद में जरुरतमंद लोगों को बिजली मुहैया कराई जा सकती है.

हंस 300 पावरपैक इतनी बिजली पैदा करता है कि इससे कई बल्ब, टीवी, पंखे जैसी मूलभूत आवश्यकता वाली चीजें चलाई जा सकती हैं. इसे इवेंट के दौरान 130 घंटे और 300 घंटे का पावर देने वाले दो वैरिएंट में पेश किया गया. इनकी कीमत क्रमश: 10,000 रुपये और 14,000 रुपये रखी गई है. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इसकी गारंटी 12 सालों की है. यानी 12 साल तक बिजली के बिल से आजादी. इससे संबंधित जानकारियां BIC2.in से ली जा सकती है.

भारत में इसे अगले साल मई में लाने की योजना है. भार्गव ने कहा कि, हंस पावरपैक और हंस सोलर ब्रिफकेस के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की जरुरतों को पूरा किया जा सकता है और इसके लिए उन्हें बिल भी नहीं चुकाना होगा. उन्होंने आगे कहा कि, बिजली एक मूलभूत जरुरत है, जिससे शिक्षा, रोजगार और संचार जैसी अवसरों के दरवाजे खुल जाते हैं. इसके बावजूद दुनिया की आधी आबादी को केवल हर दिन 2-3 घंटे ही बिजली मिल पाती है.

इवेंट के दौरान दो रेनमेकर फिल्ट्रेशन यूनिट्स को भी दिखाया गया है, जिससे खारे और गंदे पानी को साफ कर कृषि और पीने योग्य बनाया जा सकता है. बकौल भार्गव आज की तारीख में बहुत सी गंभीर बिमारियों की वजह खराब पानी है, ऐसे में हमारा उद्देश्य लोगों तक शुद्धपेयजल पहुंचाना है ताकी वे अच्छी जिंदगी महसूस कर सकें.

इसके अलावा इवेंट में भार्गव ने शिवांश फर्टीलाइजर मेथड की जानकारियां भी दीं, जिससे वेस्ट मटेरियल से न्यूट्रीयंट से भरपूर खाद बनाए जा सकते हैं. वो भी सिर्फ 18 घंटे में. किसान इसे कृषि में यूरियो के विकल्प के रूप में प्रयोग कर सकते हैं.

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