स्वाइन फ्लू संक्रमण से बचें 

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स्वाइन फ्लू एक बेहद गंभीर संक्रमण है। ऐसे में बचाव के साथ ही इसका शुरूआती स्तर पर इलाज अच्छा रहता है। विशेषकर बरसात के मौसम में संक्रमणका खतरा और भी बढ़ जाता है, इसलिए विशेष रूप से सतर्कता बरतना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह ही होते हैं। बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खाँसी आना, कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं, जो आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।

स्वाइन फ्लू एक ऐसी जानलेवा बीमारी है, जो व्यक्ति को कब मृत्यू की ओर खींच ले जाए, पता नहीं चलता। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसीएच) में स्वाइन फ्लू से एक सरकारी चिकित्सक की हाल ही में मौत हुई है। इस साल प्रदेश में स्वाइन फ्लू से यह तीसरी मौत है।

वहीं हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़कर इस साल पांच हो गया है। इससे पहले आईजीएमसीएच में महाराष्ट्र से आए 57 वर्षीय पर्यटक की 17 मई को मौत हो गई थी।

वायरस से फैलती है बीमारी
स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ी बीमारी वाला वायरस है जो छीकने या इसके वायरस के संपर्क में आने से फैलती है। किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू की पहचान करना बेहद जरूरी होता है क्योंकी इसकी सही समय पर पहचान ना होने पर उसे गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उसके संपर्क में आकर अन्य व्यक्तियों में भी यह संक्रमण फैल सकता है। स्वाइन फ्लू का उपचार सामान्य फ्लू के जैसे ही किया जाता है, बुखार, कफ, और ठंड के बचाव के लिये दवाए दी जाती हैं, कुछ लोगों को शायद विषाणुरोधक दवाए (एंटीवायरल) या उपचार की ज़रुरत पड सकती है।
डॉक्टर से सलाह लें

स्वाइन फ्लू होने पर डॉक्टर आपको बुखार व कफ के लिए ‘टेमीफ्लु’ या ‘रेलेंजा’ जैसी एंटीवायरस दवाईयां दे सकता है। इन दवाईयों को रोग शुरू होने के 2 दिन के अंदर ही ले लेना चाहिए क्योंकि जितनी जल्दी ये दवाईयां शुरू होंगी उतना ही लाभ होगा। आमतौर पर ये दवाईयां 5 दिनों के लिए दी जाती हैं। वैसे ये दवाईयां फ्लू को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं लेकिन ये बीमारी की अवधि व लक्षणों को कम करने के अलावा न्यूमोनिया जैसी बीमारी के खतरे को भी कम करती हैं।
स्वाइन फ्लु के अधिकतर मरीज़ सही इलाज से ठीक हो जाते हैं। उपचार के अंतर्गत पर्याप्त आराम, बुखार और ठंड को ठीक करने के लिए पेरासिटामोल दिया जाता है। कभी कभी बच्चों को अतिरिक्त उपचार भी दिया जाता है लेकिन यहां पर यह सलाह दी जाती है कि कोई भी उपचार शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह ले लें ! 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐस्पिरिन से जुडे हुए दवा उपचार का प्रयोग न करने दें।