स्लिप डिस्क के कारण लक्षण और सामान्य उपचार

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स्लिप डिस्क जिसे spinal disc herniation भी कहते हैं | ये हमारे रीढ़ की हड्डी में होने वाली एक परेशानी है,रीढ़ की हड्डी ही हमारे पुरे शरीर को गति प्रदान करती है | रीढ़ की हड्डियों के बीच cushion नाम का एक नर्म पदार्थ होता है इसे ही disc कहते हैं ये disc आपस में एक दुसरे से जुड़े हुए होते हैं और रीढ़ की हड्डी के बिलकुल बीचों बीच स्थित होती है | आगे-पीछे घुमने तथा झुकने में ये डिस्क हमारे शरीर की सहायता करती है और इस वक़्त disc का फैलाव भी होता है ताकि हमारे शरीर को लचीलापन मिल सके इससे डिस्क पर काफी दबाव भी पड़ता है और अधिक दबाव के कारण कभी कभी कमर या पीठ में अत्याधिक दर्द का कारण बन जाती है | अत्याधिक दबाव तथा उम्र बढ़ने के साथ भी रीढ़ की हड्डियों में उपस्थित डिस्क,हड्डियों से धीरे-धीरे बाहर आ जाती है आगे बढा हुआ हिस्सा spine cord पर दबाव बनाता है। उम्र के साथ साथ cartilage में Protein की मात्र घट जाती है जिससे उसके collagen fibers टूटने लगते हैं । Cartilage के नष्ट होने से सूजन आ जाती है और दोनों हड्डियाँ भी एक दूसरे पर रगड़ खाने लगती हैं । इससे दर्द होने लगता है और चलने फिरने में तकलीफ होने लगती है । कई बार उम्र के साथ-साथ यह तरल पदार्थ सूखने भी लगता है,जिसके कारण कई बार पैरों में भी दर्द और तकलीफ शुरू हो जाती है |

स्लिप डिस्क के लक्ष्ण :-स्लिप डिस्क के रोगी को उस जगह पर बहुत तीव्र दर्द महसूस होता है जिस जगह पर डिस्क अपने स्थान से खिसक गयी हो । खासतौर पर यह दर्द उस समय ज्यादा बढ़ जाता है जब रोगी अचानक सए जोर लगाकर खड़ा हो जाता है या बैठ जाता है । वजन उठाते समय भी यह दर्द एक दम से बढ़ जाता है । इसके अलावा कुछ लोगों को समस्या ज्यादा बढ़ जाने के कारण साइटिका के रोग की भी शुरूआत हो जाती है जो डिस्क के खिसक जाने के कारण नस दब जाने से होती है । पीठ पर कभी कभी सूजन भी रहती है और रोगी का उठना चलना बैठना सभी दूभर हो जाता है ।

स्लिप डिस्क के कारण 

स्लिप डिस्क की परेशानी कई अन्य कारणों से भी होती है जैसेः – गलत ढंग से उठाना-बैठना,अनियमित जीवन शैली का होना,एक्सरसाइज बिलकुल भी ना करना या फिर बहुत जादा शारिरिक मेहनत करने,गिरने या फिसल जाने,तथा उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने के साथ भी होती है | कई बार स्लिप डिस्क की परेशानी हड्डियों के डिजनरेशन या रीढ़ की हड्डियों में इन्फेक्शन के कारण भी हो जाते है | स्लिप डिस्क की परेशानी होने से पैरो,कमर या गर्दन में हमेशा दर्द रह सकता है और कभी कभी पैर सुन्न भी पड़ सकते है,नसों में तनाव का होना भी स्लिप डिस्क का एक कारण हो सकती है |

1  पांच लौंग और पांच काली मिर्च पीस ले और इसमें सुखी अदरक का पाउडर भी मिला ले। इस मिश्रण को चाय की तरह एक काढ़ा बना कर दिन में दो बार पिए।

2 दो ग्राम दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद मिला ले और दिन में दो बार इसका सेवन करे, इस उपाय से बैक पैन दूर होने लगेगा।

3 कमर के दर्द का देसी इलाज में लहसुन दर्द निवारक दवा का काम करता है। भोजन में लहसुन जादा प्रयोग करे, इसके सेवन से पुराना कमर दर्द भी दूर होने लगता है।

4 भोजन में ऐसी चीजें अधिक खाए जिसमें कैल्शियम और विटामिन डी जादा हो, इससे हड्डियां मजबूत होंगी। रोजाना दो गिलास दूध पिए और कुछ देर धूप में बैठे।

5 कमर का दर्द ठीक करने में गूगल का प्रयोग उत्तम देसी उपाय है। गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच गूगल लेने से कमर दर्द से राहत मिलती है।

6 नारियल या सरसों के तेल में लहसुन की तीन से चार कलियाँ डाले और गरम करे। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करे।

7 एक तौलिया नमक वाले गरम पानी में भिगो कर निचोड़ ले। अब पेट के बल लेट जाये और तौलिये से दर्द वाली जगह पर भाप देने से कमर के दर्द से राहत मिलती है।

8 दो से तीन चम्मच नमक एक कढ़ाई में डाल कर गरम कर ले। अब एक मोटा सूती कपड़ा ले और उसमे ये नमक डाल कर पोटली बना ले फिर इससे सिकाई करे।

9 एक कप सेंधा नमक एक बाल्टी गरम पानी में डालें और घोले। अब पानी हल्का ठंडा होने पर इससे नहाए। इस घरेलू उपाय से कमर की जकड़न और दर्द से निजात मिलेगी।

10 खाने में गोभी, टमाटर, खीरा, चुकंदर, पालक, ककड़ी, गाजर और फलों का सेवन अधिक करे।

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