सेब की 55 प्रतिशत फसल हुई बारिश से चौपट

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दूसरे चरण के नुकसान की गणना जारी | चंबा । बारिश नहीं हो तो दिक्कत हो जाती हैं और यदि हद से ज्यादा हो जाती तो फिर दिक्कत हो जाती है। इसके कारण कई बार फसल बेकार हो जाती है। पिछले दिनों पहाड़ी राज्य हिमाचल में हुई तेज बारिश की वजह से चुराह क्षेत्र में सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है। एसडीएम चुराह व बागवानी विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में सेब की फसल के नुकसान का आंकलन किया। इस दौरान पाया कि चुराह के बैरागढ़, भंजराडू, सेइकोठी, झझाकोठी, थल्ली, चांजू, चरड़ा, करेरी, चरोड़ी, कल्हेल, चोली, कोहाल में करीब 1700 हेक्टेयर भूमि पर सेब की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। बता दे की उपमंडल चुराह क्षेत्र में 3300 हेक्टेयर भूमि पर सेब की फसल की पैदावार की जाती है। पहली मौसम की मार में चुराह की आधे से ज्यादा सेब की 55 प्रतिशत फसल भारी बारीश तूफान ओर ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई, जिसने बागवानी की कमर तोड़ दी। बागवानी विभाग के अनुसार बीते दिनों कई स्थानों पर तूफान भारी बारिश ओर ओलावृष्टि के कारण सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। नुकसान का आंकलन अब पहले चरण को मिलाकर 55 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। विभाग की ओर से अभी दूसरे चरण में हुए नुकसान के आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें सेब के नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

गौरतलब है कि चुराह घाटी के अधिकतर ग्रामीण लोग सेब की पैदावार पर निर्भर होते हैं और हर साल चुराह से करोड़ों रुपये का सेब बाहरी मंडियों में बेचा जाता है। लेकिन इस बार यह आंकड़ा केवल लाखों पर ही रुक जाएगा, क्योंकि चुराह में अब कम ही सेब की पैदावार बची है, जो बागवानों को काफी निराश कर रही है। सेब की फसल पर निर्भर रहने वाले बागवान बर्बादी का मंजर देखकर काफी चतित हैं। वह हर साल लाखों का सेब मंडियों में बेचते थे। लेकिन इस बार सेब की फसल उनके परिवार के लालन-पालन के लिए काफी नहीं है।

 

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