साबुन का इस्तेमाल करें पर जरा संभलकर

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जानिए साबुन के नुकसान और अपनी त्वचा के अनुसार सही साबुन कैसे चुने ? क्या नेचुरल चीजे साबुन से बेहतर विकल्प हो सकती हैं ? त्वचा के सौंदर्य और उसकी सफाई करने में साबुन का प्रयोग प्राय सभी करते है। यदि आपकी त्वचा पहले से ही स्वस्थ, कोमल और कांतिमय है, तो फिर आपका रूप बिना मेकअप किए भी आकर्षक लगेगा। फिर भी शरीर की बाहरी त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए उसकी सफाई करना जरूरी होता है। शरीर की गंदगी और मिट्टी, धूल, मैल व पसीने को धोने में साबुन का प्रयोग करना जरुरी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की सही प्रकार का साबुन का प्रयोग ना करने से त्वचा को उलटे नुकसान भी हो सकता हैं ? इन्ही सब शंकाओ का निवारण इस लेख में किया गया हैं |

साबुन के प्रकार : सबसे पहले कपड़े धोने के साबुन को बनाया गया था, फिर उसमें सुधार करके नहाने और शेविंग करने का साबुन बनाया गया था। आजकल कीटाणुनाशक साबुन, ग्लिसरीन वाले पारदर्शक साबुन, नीम के सत्व से बना साबुन, चंदन, गुलाब, मोगरा, चमेली आदि की खुशबू से युक्त साबुन, लिक्विड साबुन भी मिलने लगा है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि कपड़े धोने का साबुन शरीर की सफाई करने के लिए प्रयोग में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में सोडा होने के कारण यह त्वचा पर जलन, खुजली, दरारे पैदा कर सकता है। कपड़े धोने के साबुन में सोडा और चिकनाई का अनुपात एक और पांच का होता है। अच्छे साबुन में निम्न चार विशेषताएं होती हैं- 1. उनमें स्वतंत्र क्षार (Free alkalis) नहीं होते, 2. इस्तेमाल के समय चटकते नहीं हैं 3. अल्कोहल में पूरी तरह घुल जाने वाले होते हैं 4. नमी की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती।

साबुन का त्वचा पर नुकसान :

जब हम शरीर पर साबुन को लगाते हैं, तो पानी से तैयार साबुन का घोल हमारे शरीर से धूल, मैल, अनेक प्रकार के जीवाणुओं को बहाकर नष्ट कर देता है। मगर बार-बार साबुन लगाते रहने से त्वचा की स्वाभाविक चिकनाई और अम्लता भी साबुन में मिले केमिकल के कारण कम होती रहती है, ध्यान रहे चिकनाई त्वचा को फटने से और अम्लता बहुत से रोगों के कीटाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है।
साबुन बनाने में इस्तमाल होने वाले तेज़ रसायनों की महक को दबाने के लिए उसमे ज्यादा तेज़ खुशबू का प्रयोग किया जाता हैं |
Sulfates नाम के केमिकल को ज्यादा झाग बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है sodium lauryl sulfate से त्वचा का कुदरती तेल निकल जाता हैं |

समान्यत साबुन 5 प्रकार के होते हैं :

रसायन वाले साबुन – अगर आपकी स्किन सामन्य हैं तो अक्सर सभी लोग बिना किसी खास पड़ताल के ज्यादातर इन्ही साबुनों का प्रयोग करते है जो लगभग सभी ब्रांड बनाते है | इन साबुनों में सुगंध, डिटर्जेंट या अन्य रसायनों होते हैं जो हमारी त्वचा को साफ कर सकते हैं लेकिन ये त्वचा से नमी भी कम कर देते हैं।

ग्लिसरीन: ग्लिसरीन साबुन बनाने की प्रक्रिया का एक उप-उत्पाद है जो निर्माताओं द्वारा लोशन जैसी अन्य उत्पादों को बनाने के लिए निकाला जाता है। ग्लिसरीन साबुन आम तौर पर पारदर्शी (आर-पार दिखने वाले ) होते हैं और आपकी त्वचा की नरम बनाये रखने में मदद करते हैं । जिन लोगों के एलर्जी , सफेद दाग या सेंसेटिव स्किन होती है उनके लिए ग्लिसरीन युक्त साबुन अच्छा होता है।

हल्के रसायनों से बने साबुन (हर्बल साबुन ): इस प्रकार के साबुन में मॉइस्चराइजिंग क्लीनर्स होते हैं जो त्वचा की नमी को हटाए बिना त्वचा को साफ करते हैं। अक्सर ये हर्बल या आयुर्वेदिक कम्पनियों द्वारा बनाये जाते है और इनमे ‘दूध’,मलाई, हल्दी से बना होने का दावा किया जाता हैं। ये नियमित साबुन से ज्यादा महंगे होते हैं लेकिन संवेदनशील या शुष्क त्वचा वाले लोगों के लिए अच्छे होते है |

एंटी बैक्टीरियल साबुन: एंटी बैक्टीरिया साबुन में टीरिक्लोसैन की ज्यादा मात्रा होती है जो कि शरीर पर कई दुष्प्रभावों के लिए जाना जाता है। ये साबुन त्वचा को ज्यादा सुखा देते हैं | लेकिन जब व्यक्ति किसी संक्रमण से पीड़ित हो या किसी बीमारी में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। सामान्य अवस्था में इनका उपयोग नहीं करना चाहिए |

अरोमाथैरेपी वाला साबुन- यह साबुन एसेंशियल ऑयल और सुगंधित फूलों के अर्क से तैयार किये जाते हैं। इनका प्रयोग करने से शरीर को आराम मिलता हैं और दिमाग को शांति भी मिलती हैं |

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