शवासन कैसे करें

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शवासन केवल व्यायाम या योगासन या मैडिटेशन नहीं बल्कि यह अपने आप में एक जादुई प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी आतंरिक सुप्त शक्तियां जागृत करके सब कुछ पा सकता है| यह एक अद्भुत मैडिटेशन प्रक्रिया (Deep Relaxation Process) है जिससे व्यक्ति अपनी आतारिक शक्ति का उपयोग करके सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोग दूर कर सकता है|

आधुनिक युग में मानवी एक यंत्र समान जीवन जी रहा है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी जीते हुए शारीरक और मानसिक थकान होना आम बात है। इसी प्रकार की शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करने के लिए शवासन उत्तम व्यायाम होता है। इस आसन को हर आयु के व्यक्ति सहजता से कर सकते हैं। इस आसान में हमें एक मुर्दे की तरह (जैसे एक निष्प्राण शरीर पड़ा हो) लेटना होता है। इसीलिए इसे शव+आसान=शवासन कहा जाता है।

शवासन कैसे करें विधि:

  • सर्वप्रथम स्वच्छ जगह पर चटाई बिछा कर पीठ के बल लैट जाए। इतना सुनिश्चित कर लें की ज़मीन समतल हों। और आस-पास किसी तरह की शोर ना हों। खुली जगह पर इस आसन को करने से अधिक लाभ प्राप्त होगा। शवासन हो सके तो सुबह में ही करें।
  • पीठ के बल सीधे लेट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों को सीधा रखें। दोनों हाथ अब ज़मीन पर रख दें। अब कमर और दोनों हाथ की हथेलियों के बीच छ: इंच का अंतर रहे इस तरह दोनों हाथ फैला कर रख दें।
  • अब अपनें दोनों पैरों को इस तरह फैला कर रखें कि उनके बीच में एक से सवा फुट का अंतर रहे।
  • शवासन प्रक्रिया के दौरान अपनी आँखें तथा मुख बंद रखें। अपने चहरे के सारे स्नायु (muscles) को शिथिल (relax) कर दीजिये।
  • अब धीरे धीरे अपनें पूरे शरीर को शिथिल कर दें या ढीला छोड़ दें। पैर से लेकर सर तक शरीर के एक एक अंग पर ध्यान लगा कर उसे बिलकुल शिथिल करते जाएँ। (Note- शिथिल करना = ढीला छोड़ना = मुक्त कर देना)
    धीरे धीरे सांस लेते रहें और एक आजाद पंछी की तरह सारी चिंताएं मिटा दे।
  • शरीर के सारे अंग शिथिल कर लेने के बाद अपना सारा ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर केन्द्रित करें।
    ध्यान रहे की शवासन का अभ्यास करते वक्त और किसी भी विषय में सोचना नहीं है। सम्पूर्ण ध्यान अपनें श्वास पर लगाना है।
  • यह आसन करते वक्त निंद्रा आने लगे तो उस वक्त एक थोड़ी तेज़ और गहेरी सांस लेनी होती है। ऐसा करने से निंद्रा दूर हो जायेगी।
  • शवासन तीन से पांच मिनट तक करें। यह आसन पांच मिनट से अधिक समय तक करने पर भी कोई नुकसान नहीं होता है। परंतु शवासन में सो नहीं जाना है, यह याद रखे।
  • शवासन अभ्यास ख़त्म कर लेने के बाद धीरे से सांस शरीर के बाहर छोड़नी चाहिए। और आँखें खोल कर, अपनी बाईं (left) तरफ से उठना चाहिए। (Note- बैठनें के बाद उठना होता है।)।
  • दूसरे आसन जितनी देर किए हों, उतनी ही देर शवासन कर के थकान मिटानी चाहिए। मान लीजिये की मयूरासन पांच मिनट तक किया है, तो उसके तुरंत बाद पांच मिनट तक शवासन करना चाहिए।
  • प्रति एक आसन को शुरू करने से पूर्व और खत्म कर लेने के बाद शवासन करना लाभदायी होता है।

Note: शवासन की प्रक्रिया बहुत ही आसान है, लेकिन इस आसन को सबसे मुश्किल आसन माना जाता है क्योंकि शरीर को पूर्ण से शिथिल करना शुरुआत में बहुत मुश्किल होता है| इसलिए सही प्रक्रिया अपनाते हुए धीरे धीरे हर रोज इसका अभ्यास करें|

शवासन के फायदे:

  • मानसिक तनाव और शारीरिक थकान दूर करने का यह एक उत्तम उपाय है। शवासन करने से शरीर के सभी स्नायुओं को आराम मिलता है।
  • शवासन करने के बाद शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता है। इस आसन को निरंतर करने से अनियंत्रित हृदय गति की समस्या दूर हो जाती है।
  • शवासन करने से चयापचय की गति नियंत्रित हो जाती है।
  • दूसरे अन्य आसन करने से शरीर को जो थकान होती है उसे जल्दी से दूर करने के लिए शवासन किया जा सकता है।
  • शवासन करने से मानव शरीर के मस्तिस्क की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। और मन को शांति मिलती है।
  • प्रति दिन सुबह में शवासन किया जाए तो आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • शवासन करने से याददस्त तेज़ हो जाती है। किसी भी कार्य को त्वरित गति से करने के लिए एकाग्रता शक्ति विकसित होती है (Decision Making Power Improve होती है)।
  • शवासन करने से मधुप्रमेह के रोगी को sugar control करनें में मदद मिलती है।
  • अनिंद्रा की समस्या और मन के सभी तरह के विकार दूर करने के लिए शवासन किया जा सकता है।
  • उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित व्यक्ति शवासन कर के लाभ पा सकते हैं।
  • अवसाद, और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए शवासन करना खूब लाभदायक होता है।
  • शवासन करने से व्यक्ति के अंदर से क्रोध और चिड़चिड़ा पन, और अत्याधिक चंचलता दूर हो जाता है। चूँकि यह एक तनाव नाशक आसन है।
  • शवासन अभ्यास से व्यक्ति की ध्यान लगाने की शक्ति विकसित हो जाती है।

शवासन करने से पूर्व सावधानी:

  • शवासन एक सरल आसन है, किसी भी आयु के व्यक्ति को इस आसन को करने पर लगभग कोई हानी नहीं होती है, परंतु अगर किसी व्यक्ति को डॉक्टर नें पीठ के बल लेटनें से मना किया हों तो उन्हे यह आसन अभ्यास नहीं करना चाहिए। सामान्यतः सभी योग आसन पूर्ण करने के बाद शवासन अवश्य करना चाहिए।
  • देखनें में शवासन काफी आसन लगता है। परंतु इसे perfect तरीके से करने में कुछ समय का अभ्यास लग जाता है।
  • ई बार लोगों को शवासन करते समय निंद्रा आ जाती है, या फिर ध्यान भंग हो जाता है। ऐसा हो जाने पर शरीर को हानी तो नहीं होती, पर शवासन करने का लाभ भी नहीं मिलता है। इस लिए कई योगी शवासन अभ्यास को को सब से कठिन आसन भी बताते हैं।
  • (Note- शव एक संस्कृत शब्द है, शव का अर्थ मुर्दा होता है, जिसे अंग्रेजी में Corpse कहा जाता है)।