शराब से बढ़ता है हैपेटाइटिस-सी का खतरा 

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हैपेटाइटिस-सी एक जानलेवा बीमारी है, इस बीमारी के पीड़ितों को शराब से दूर रहना चाहिये। शराब का सेवन लिवर के खराब होने और हैपेटाइटिस-सी वायरस से मौत के खतरे को बढ़ा सकता है। यह ताजा अध्ययन के अनुसार हैपेटाइटिस-सी से पीड़ित अधिकतर लोग या तो पहले या फिर वर्तमान समय में अधिक शराब पीने वाले होते हैं। हैपेटाइटिस-सी के मरीजों के लिए शराब का सेवन विशेष रूप से नुकसानदेह है।

शराब बैक्टीरिया बनने की प्रक्रिया को तेज कर देती है इस अध्ययन के प्रमुख लेखक सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन्स डिवीजन ऑफ वायरल हैपेटाइटिस के अंबर एल. टेलर कहते हैं कि शराब हैपेटाइटिस सी से पीड़ित लोगों के अंगों में रेशेदार बैक्टीरिया तेजी से बनने की बीमारी फाइब्रोसिस और लिवर के सामान्य काम करने में बाधा उत्पन्न करने वाली बीमारी सिरोसिस को तेजी से बढ़ाता है। इसकी वजह से उनके लिए शराब पीना एक जानलेवा गतिविधि हो जाती है।
शराब लिवर की बीमारी बढ़ाने का तीसरा सबसे बड़ा कारण

इसमें टेलर कहते हैं, वर्ष 2010 में हैपेटाइटिस-सी से पीड़ित लोगों में शराब से जुड़ी लिवर की बीमारी से मरने का तीसरा सबसे बड़ा कारण था। शराब पीने और हैपेटाइटिस-सी के बीच का रिश्ता समझने के लिए जांचकर्ताओं ने खुद कौन कितनी शराब पीता है इसकी जानकारी ली। कई लोगों को नहीं होती इस बीमारी की जानकारी

इस अध्ययन दल ने हैपेटाइटिस-सी से संक्रमण दर को जानने के चार समूहों का अध्ययन किया। पहला समूह जो जीवन में कभी शराब नहीं पीने वाला था, दूसरा पहले शराब पीता था, एक समूह ऐसा था जो शराब अब भी पीता था लेकिन अधिक नहीं और चौथा समूह वर्तमान समय में अधिक शराब पीने वालों का था। जिन लोगों ने इस अध्ययन में हिस्सा लिया था और हैपेटाइटिस-सी से संक्रमित पाए गए थे। उनमें से आधे को इसका पता नहीं था कि उन्हें हैपेटाइटिस-सी है।
जागरूकता फैलाना है जरूरी
इस अध्ययन के द्वारा मुहैया कराई गई नई जानकारी हैपेटाइटिस-सी होते हुए भी कौन कितना शराब पीता है उस पर रोशनी डालने में मददगार है। जिन लोगों की जांच नहीं की गई है उन लोगों में हैपेटाइटिस-सी की जांच कराने के बारे में जागरूकता फैलाई जाए, ताकि इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके और जो इससे संक्रमित हैं उनका जीवन बचाने के लिए उनका इलाज शुरू किया जा सके।