व्यवसाय को इस प्रकार बनाये लाभकारी

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कारोबार बढ़ाने में भी वास्तु के उपाय बेहद लाभदायक होते हैं। कार्यालय वह जगह है जहां लोग पेशेवर ढंग से अपने पेशे और व्यापार के लिए लक्षित होकर काम करते हैं। यह जगह धन सृजन के साथ-साथ प्रतिष्ठा और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति की जगह है। सैद्धांतिक तौर पर ऑफिस को सकारात्मक उर्जा से भरा होना चाहिए, माहौल में रौशनी की अधिकता होनी चाहिए, साथ इसका डिजायन भी आकर्षक और सुविधाजनक होना चाहिए। भारतीय वास्तुशास्त्रों में ऑफिस को व्यवसाय स्थल, कार्यस्थान या कार्यालय कहा गया है और अनेक विस्तृत उपायों की चर्चा की गई, जिसे अपना कर लाभ उठाया जा सकता ह।

भारतीय वास्तुशास्त्रों के अनुसार कार्यालय की बिल्डिंग के लिए उसका प्लॉट चौकोर या आयताकार होना सबसे लाभकारी होता है। अनियमित आकार के भूखंडों से बचने का सुझाव इन ग्रंथों में दिया गया है।
कार्यालय के बॉस या कंपनी के मालिक के बैठने का स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां किसी आगंतुक की दृष्टि सीधे उसपे न पड़े। इसके लिए ग्रंथों में दक्षिण-पश्चिम कोने में केबिन बनाने का सुझाव दिया गया है और उनका मुख उत्तर दिशा की और सर्वोत्तम माना गया है।

कार्यालय के सीनियर स्टाफ के लिए दक्षिण और पश्चिम में बैठना काफी वास्तुसम्मत माना गया है। साथ ही यह भी सुझाव है कि जब वे दक्षिण में बैठे हों, उनका मुख उत्तर की ओर होना चाहिए और पश्चिम में बैठते समय पूर्व का सामना करना चाहिए. जबकि ऑफिस के जूनियर स्टाफ के लिए पूर्व और उत्तरी भाग की जगह सर्वोत्तम मानी गई है।

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