विशेषज्ञों की राय गर्भवती महिलाएं सामान्य अवस्था की तरह करें सभी काम

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नई दिल्ली । हाल ही में केंद्र सरकार के आयुष विभाग मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को ऐसे सुझाव दिए हैं, जिनसे चिकित्सा विशेषज्ञ सहमत नही हैं। मंत्रालय ने कहा है कि स्वस्थ संतान को जन्म देने के लिए गर्भधारण के बाद महिलाओं को मांस के सेवन और शारीरिक संबंध बनाने से दूर रहना चाहिए। हालांकि इस सलाह को स्त्री रोग विशेषज्ञों ने समझ से परे बताया है। एम्स, दिल्ली के स्त्री रोग विभाग की प्रमुख प्रो. अलका कृपलानी के अनुसार जब तक कोई विशेष कारण न हो, सामान्य गर्भावस्था में महिला को वह सब काम करना चाहिए, जो वह सामान्य अवस्था में करती आई है।

इसमें शारीरिक संबंध बनाना भी शामिल है। वहीं मांसाहारी भोजन के बारे में कृपलानी ने कहा कि मछली और चिकन स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं, जबकि लाल मांस कोलेस्टेरॉल का स्तर बढ़ाता है। इसलिए ऐसी कोई बात नहीं है कि गर्भावस्था के दौरान मांस खाने से बचना चाहिए। यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत होता है। अलबत्ता गर्भावस्था में तो प्रोटीन उच्च मात्रा में लेना चाहिए। मैं यह नहीं कह रही कि जो गर्भवती शाकाहारी है वह भी मांसाहारी प्रोटीन लेना शुरू कर दें, लेकिन जो महिलाएं यह खाती हैं, उन्हें इसे जारी रखना चाहिए।

बता दें कि भारत में हर साल 2.6 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। दरअसल, 9 जून को योग पर आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संपादकों के सम्मेंलन में आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री श्रीपद यसो नाइक ने एक बुकलेट जारी की थी। बुकलेट में गर्भवतियों को महान हस्तियों की जीवनी पढ़ने, शांत रहने के साथ-साथ गुस्सा न करने व शारीरिक संबंध न बनाने का सुझाव दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी सलाह दी है कि गर्भवती महिलाओं को अपने कमरे में स्वस्थ बच्चों की खूबसूरत तस्वीरें लगानी चाहिए। इससे उनका मन अच्छा रहेगा और मन में अच्छे विचारों का संचार होगा।