वाहन डीलरों को जीएसटी से लग सकती है चपत

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नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण वाहन डीलरों को अपना बचा स्टॉक निपटाने में 1,000 करोड़ रुपए की चपत लग सकती है। ये डीलर अपने शोरूम और स्टॉक में कारों, दोपहिया वाहनों और व्यावसायिक वाहनों की अच्छी खासी संख्या रखते हैं। जीएसटी के 1 जुलाई से लागू होने की संभावना है यानी 30 जून तक डीलरों के स्टॉक, शोरूम या रास्ते में जो वाहन होंगे उस पर उत्पाद शुल्क चुकाया गया होगा लेकिन उन्हें केवल 40 फीसदी हिस्सा ही केंद्रीय जीएसटी क्रेडिट के रूप में वापस मिलेगा। वाहन विनिर्माता का संगठन सायम ने इस सप्ताह की शुरुआत में यह मुद्दा राजस्व विभाग के समक्ष उठाया। सायम का कहना है कि डीलर अपने पास 4 से 8 सप्ताह का स्टॉक रखते हैं। यह वाहन के प्रकार और विनिर्माण इकाई से शोरूम की दूरी पर निर्भर करता है। सायम का कहना है कि यह स्टॉक 48,000 करोड़ रुपये का है। इसमें कार, दोपहिया, तिपहिया, हल्के और भारी व्यावसायिक वाहन तथा कलपुर्जे शामिल हैं। 1 जुलाई से डीलरों को जीएसटी के हिसाब से बिल बनाना पड़ेगा। जैसे कार पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा और अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से 15 फीसदी तक उपकर लगेगा। जीएसटी में उत्पाद शुल्क, वैट और दूसरे उपकरों आदि का विलय हो जाएगा। मौजूदा व्यवस्था में डीलर वैट देता है जबकि 14 फीसदी उत्पाद शुल्क निर्माता कंपनी वहन करती है।

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