वायु प्रदूषण भी है दिल की बीमारियों की प्रमुख वजह

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धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, चर्बी के असामान्य स्तर, तनाव आदि की वजह से होने वाले हृदय रोग बड़ी संख्या में मौत का कारण बनते हैं। दवाओं के इस्तेमाल के अलावा नियमित व्यायाम, नियंत्रित वजन, चर्बीयुक्त खाद्यपदार्थों का त्याग और धूम्रपान से दूर रहने आदि कुछ उपाय हैं, जो आपको दृदय रोगों से बचा सकते हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि हाल के दिनों में प्रदूषण हृदय रोगों की एक प्रमुख वजह के रूप में सामने आया है। चिंता की बात यह है कि इसके प्रति लोगों में बिल्कुल जागरूकता नहीं है।

वातावरण में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण अस्थमा, श्वसन तंत्र के रोगों तथा फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं, यह तो प्राय: सभी जानते हैं, लेकिन हृदय रोगों में इसकी भूमिका को लेकर लोग ज्यादा जागरूक नहीं हैं। अमेरिका और यूरोप में किए गए कुछ अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषण और हृदय रोगों के बीच गहरा संबंध है। प्रदूषित हवा में अनेक तत्व होते हैं, जो हमारे हृदय के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। हवा में मौजूद कण कई स्रोतों से आते हैं। अलग-अलग आकार-प्रकार और तत्वों से युक्त ये कण हमारे हृदय को अनेक तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन कणों में महीन कणों के अलावा तरल पदार्थों की महीन बूंदें भी शामिल होती हैं, जो विभिन्न अम्लों, रसायनों, धातुओं और अकार्बनिक पदार्थौं से बनती हैं। इन्हें आकार के हिसाब से तीन वर्गों में बांटा जा सकता है। तुलनात्मक रुप से बड़े कण, सूक्ष्म कण और अति सूक्ष्म कण। इनमें सबसे खतरनाक अतिसूक्ष्म कण होते हैं, जिन्हें संक्षेप में पीएम कहते हैं। इनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। चूंकि पीएम बेहद छोटे आकार के होते हैं, लिहाजा ये सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं। इस लिए श्वसन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियों का कारण बनते हैं। हवा और गतिमान वाहनों की वजह से हवा में धूल कणों की भरमार से तो प्रदूषण होता ही है। वाहनों और बिजली संयंत्रों में जीवाश्म ईंधन या लकड़ी जलाने और औद्योगिकी गतिविधियां हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती हैं। विकासशील देशों में घरों के भीतर ठोस ईंधन जलाने की वजह से पैदा होने वाला प्रदूषण भी वायु प्रदूषण की एक प्रमुख वजह है।

वायु प्रदूषण पहले से ही हृदय रोगों से प्रभावित लोगों की स्थिति को गंभीर तो करता ही है, साथ ही स्वस्थ लोगों में हृदय रोग का कारण भी बनता है। इसकी वजह से मधुमेह और मोटापे की समस्या भी बढ़ती है, जो अंतत: हृदय के लिए ही खतरा बनता है। वायु प्रदूषण की वजह से हृदय रोग होने की संभावना बहुत बढ़ गई है। कई विकसित देशों में सूक्ष्म कण संबंधी वायु गुणवत्ता के मानक काफी कड़े हैं, लेकिन मौजूदा मानकों के आधार पर भी हृदय रोगों के लिए जोखिम बना हुआ है। इस लिए हवा की गुणवत्ता का स्तर सुधारे जाने की जरूरत है। भारत में हवा की गुणवत्ता का स्तर काफी कम है। इस दिशा में प्रयास किए जाने की जरूरत है।