ये मंत्र दिलाएगा धन, आने वाली सौ पुश्तें करेंगी राज़!

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हर किसी को है धन की चाहत: आपके संबंधियों में क्या कोई ऐसा है जो कहता हो कि वह अपनी लाइफ से संतुष्ट है? उसकी जिंदगी ने उसे सब दिया है और उसके पास जितनी धन-दौलत है बस वही काफी है? मेरे ख्याल से ऐसी बात कहने वाला कोई नहीं है, यदि कोई है तो वह संत-महात्मा होगा जो दुनिया के जंजाल से दूर भगवान को ही सब कुछ मानता है।

सबकी किस्मत अलग: क्योंकि ढेर सारी दौलत और हर तरह की सुख-सुविधाएं हर किसी की चाहत है। इसके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। वो बात अलग है कि हर किसी की किस्मत में बहुत सारा धन नहीं होता।

कोई अमीर तो कोई गरीब: कोई बेहद अमीर है तो कोई सड़क पर धक्के खा रहा है। या फिर कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनके पास गुजारे लायक पैसा तो है, लेकिन अपनी सारी इच्छाएं पूरी करने के लिए उन्हें सब्र करना पड़ता है।

आपको चाहिए पैसा?: पर अगर आप उन लोगों में से हैं जो बेशुमार धन की चाहत रखते हैं और ना केवल स्वयं के लिए बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी यही सपना देखते हैं तो हम आपको एक मंत्र बता सकते हैं।

ढेर सारा धन: हिन्दू शास्त्रों में हर परेशानी का हल है, यदि इसे इस्तेमाल किया जाए तो प्रत्येक व्यक्ति सुख को प्राप्त करेगा। इन्हीं शास्त्रों में हमें धन प्राप्ति के भी अचूक उपाय बताए गए हैं।

माँ लक्ष्मी: शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। मां की उपासना करने वाला व्यक्ति आर्थिक रूप से हमेशा सक्षम रहता है। उसे कंगाली जैसा वक्त नहीं देखना पड़ता।

आदित्य मंत्र: लेकिन मां लक्ष्मी के अलावा आदित्य देव यानि कि भगवान सूर्य की उपासना भी धन प्राप्ति के लिए सफल मानी गई है। ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में आदित्य मंत्र का उच्चारण किया जाता हैं उस घर-परिवार में एक हजार वर्ष तक गरीबी नहीं आती। तन, मन और धन से समृद्धि बनी रहती है।

यहाँ है मंत्र: यह मंत्र इस प्रकार है – “जन्मान्तर सहस्त्रेषु, दारिद्रयं नोपजायते”। इस मंत्र का जो भी व्यक्ति सही उच्चारण सहित जाप कर लेता है, वह युगों तक अपनी आने वाली पीढ़ी को धन-दौलत का समुद्र दे जाता है।

ऐसे करें जाप: आदित्य मंत्र का जाप करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। नित्य कामों से निवृत होकर शुद्ध वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाना चाहिए और फिर मंत्र का सही उच्चारण के साथ जाप करना चाहिए।

एक माला करें: शास्त्रों में प्रत्येक मंत्र को 108 यानि कि एक माला करना शुभ माना गया है। आप आदित्य मंत्र को भी कम से कम एक माला जरूर करें और यदि इच्छा हो तो 2 या 3 माला भी कर सकते हैं।

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