मेडिटेशन करने का सही तरीका सीखे

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मेडिटेशन करने का तरीका: मेडिटेशन करने का तरीका जानने से पहले हमारा यह जानना जरूरी है कि मेडिटेशन क्या है ? और ये हमारे क्यों लाभकारी है, मेडिटेशन कैसे करें, मेडिटेशन के लाभ कई लाभ है. कैसे श्वास लें, कैसे जीवन जीएं, कैसे जिंदा रहें या कैसे प्यार करें. आपसे Question पूछा जा सकता है कि क्या आप हंसना और और रोना सीखते हैं या कि पूछते हैं कि कैसे रोएं या हंसे ? सच मानो तो हमें कभी किसी ने नहीं सिखाया की हम कैसे पैदा हों और इसी विषय में एक महान योगशात्री ओशो कहते हैं कि ध्यान हमारा स्वभाव है जिसे हमने संसार की चकाचौंध के चक्कर में खो दिया है.

मेडिटेशन करने का तरीका व इसके लाभ के बार में भी जानना बहुत जरूरी है. मेडिटेशन यानी ध्यान कोई भी Human एक ही बार मे आसानी से नहीं कर पाता है ये बहुत ही संयम का काम है इसलिए सिर्फ पहले दिन करके ही हिम्मत न हारे क्योंकि एक दिन में ही किसी कार्य को सीखना लगभग Impossible है. इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. लगातार 6-7 करने के बाद ही आपका ध्यान किसी एक चीज पर केन्द्रीत होगा और धीरे धीरे इसके फायदे दिखने लगेंगे. इसलिए सिर्फ एक 1-2 दिन करके ही इसे बीच मे न छोड़े और हो सके तो Daily सिर्फ 15-20 मिनट अपने लिए निकालिए. इस पूरी दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो पैदाइशी सफल है. सब लोग सफलता और असफलता का स्वाद चखते है.

मेडिटेशन करने का तरीका: खोना–पाना, सुख–दुख के दौर जीवन में आते-जाते रहते है. कई लोग इसका बड़ी हिम्मत के साथ सामना करते है तो कई घबराकर हार मान लेते है. और ज्यादातर देखा जाता है की Exam के दौरान बच्चे Tension से जूझते है और उनके दिमाग मे तरह तरह के Negative Thoughts आते है. और जिन बच्चो का दिल कमजोर होता है उनके मन में suicide जैसे विचार भी देखे जा सकते है.

कई लोग छोटी से बीमारी मे हार मान लेते है तो कई इन मुश्किल परिस्थितयो मे भी अपना Control नहीं खोते. ऐसा क्यो होता है की एक ही Situation मे दो लोग अलग-अलग तरीके से व्यव्हार करते है. विज्ञान के अनुसार कमजोर हृदय वाले लोगो का Immune System कमजोर होता है जिसकी वजह से ऐसे लोग Tension, बीमारी और दूसरी परिस्थितियो मे जल्दी Nervous हो जाते है. और हार मान लेते है. लेकिन ऐसे लोगो के लिए सबसे बड़ा इलाज मेडिटेशन है और मेडिटेशन यानी ध्‍यान सिर्फ अध्‍यात्‍म से ही नहीं विज्ञान से भी जुड़ा है.

मेडिटेशन क्या है ये जानना बहुत जरूरी है मेडिटेशन यानी ध्यान ये एक प्रकार की योग क्रिया है जिसमें इंसान अपने मन को चेतन की एक विशेष अवस्था में लाने की कोशिश करता है. मतलब ये आपके ध्यान को केंद्रित करता है और मेडिटेशन का मुख्य उद्देश्य लाभ प्राप्त करना भी हो सकता है या मेडिटेशन करना अपने आप में एक लक्ष्य हो सकता है. इसमें अपने मन को शान्ति देने से लेकर आन्तरिक ऊर्जा या जीवन-शक्ति का निर्माण करना हो सकता है जो हमारी ज़िंदगी मे सकरात्मकता और खुशहाली लाती है.

मेडिटेशन करने का तरीका और इसे कैसे करें: तनाव और डिप्रेशन में कमी, एल्जाइमर, Diabetes, Hight Blood Pressure को Control करने जैसी कई बीमारियो से मुकाबला करने में योग और मेडिटेशन का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है. मेडिटेशन से होने वाले वाले लाभों के बारे में शायद आपको पता न हो लेकिन इसके कई सारे लाभ है जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते है. आपको बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है. और भी कई लाभ है. धूम्रपान और नशा करने की आदत को मेडिटेशन की मदद से आसानी से छोड़ सकते है मन में उत्पन्न Negative Thoughts से छुटकारा मिलता है. मेडिटेशन से हमारे शरीर से कोर्टिसोल नाम का Harmons का Secretion सही मात्रा में होता है, जिससे हमारा दिमाग शांत रहता है और Stress और Tension से मुक्ति मिलती है. और ये केवल इन्ही बीमारियों को दूर नहीं करता है बल्कि मनोवैज्ञानिक बीमारियो जैसे डिमेंशिया, अवसाद, OCD और Schizophrenia होने की संभावना को कम करता है. मेडिटेशन करने का तरीका बहुत ही आसान है.

Memory Sharp होती है, सिरदर्द से छुटकारा मिलता है, जीवन का उद्देश्य समझने में मदद मिलती है, चिंता से छुटकारा मिलता है, आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है, हमारा संसार को देखने का नजरिया बदल जाता है यानी दृष्टिकोण Positive हो जाता है जिससे हम खुद को संसार की कई समस्याओं से निजात पा सकते है. मेडिटेशन योग का ही अंग है और योग क्रिया में स्वांस को बहुत ही ज्यादा महत्त्व दिया जाता है. श्वास की गति से ही हमारी आयु घटती और बढ़ती है. श्वास को नियंत्रित करने से सभी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसीलिए श्वास क्रिया द्वारा ध्यान को केन्द्रित और सक्रिय करने में मदद मिलती है. ध्यान करतेसमय जब मन अस्थिर होकर भटक रहा हो उस समय श्वसन क्रिया पर ध्यान केन्द्रित करने से धीरे-धीरे मन और मस्तिष्क स्थिर हो जाता है और ध्यान लगने लगता है.

ध्यान करते समय गहरी श्वास लेकर धीरे-धीरे से से श्वास छोड़ने की क्रिया से जहां शरीरिक और मानसिक लाभ मिलता है, वहीं ध्यान में गति मिलती है.आंखें बंदकर पुतलियों को स्थिर करें. जीभ को जरा भी ना हिलाएं उसे पूर्णत: स्थिर रखें, जब भी किसी भी प्रकार का विचार आए तो तुरंत ही सोचना बंदकर सजग हो जाएं। इसी जबरदस्ती न करें बल्कि सहज योग अपनाएं. ध्यान करते समय देखने को ही लक्ष्य बनाएं. दूसरे नंबर पर सुनने को रखें. ध्यान दें, गौर करें कि बाहर जो ढेर सारी आवाजें हैं उनमें एक आवाज ऐसी है जो सतत जारी रहती है, जैसे प्लेन की आवाज, फेन की आवाज या  ॐ का उच्‍चारण आदि पर ध्यान दें और सन्नाटे की आवाज. इसी तरह शरीर के भीतर भी आवाज जारी है सुनने और बंद आंखों के सामने छाए अंधेरे को देखने का प्रयास करें. इसी तरह से मेडिटेशन किया जाता है.

मेडिटेशन करने का तरीका जानने से पहले उसके लिए शांत स्थान को चुनें. प्रकृति और हरे-भरे वृक्षों की भी कल्पना कर सकते हैं कि किसी पहाड़ पर बैठे हैं और मस्त हवा चल रही है. कल्पना कर सकते हैं कि आपका ईष्टदेव  आपके सामने खड़ा हैं. ‘कल्पना ध्‍यान’ को इसलिए करते हैं ताकि शुरुआत में हम मन को इधर उधर भटकाने से रोक पाएं. मेडिटेशन करने के लिए आप किसी शांत जगह मे बैठ जाये और अपने मन मे कुछ भी न सोचे. अपने शरीर को ढीला छोड़ दें और शरीर में कंपन होने दें और सिर्फ उसे महसूस करे. महसूस करे कि यह ऊर्जा आपके पांवों से ऊपर की ओर बह रही है. ये प्रक्रिया 20 मिनट तक जारी रखें. इस पर आपका ध्यान बाहरी चीजों से हटकर सिर्फ एक चीज पर केन्द्रित होगा.