मासिक धर्म के बारे में जानें ये अहम बातें

0
11

पीरियड्स (मासिक धर्म) को लेकर आज भी कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। पीरियड्स में होने वाले दर्द को कैसे कम करें से लेकर मूड स्विंग्स से निपटने के तरीके तक बताए जाते हैं लेकिन कई बातें आज भी भ्रांति बनी हुई हैं। इसमें हर लड़की की पीरियड साइकिल अलग-अलग होती ह। किसी को अठाइस दिन में ही पीरियड्स हो जाते हैं तो किसी को तीस या चौतीस दिन बाद।

किसी महिला के लिए ये साइकिल छत्तीस दिन तक भी खिंच सकती है। मतलब सबके शरीर के हिसाब से दिन कम या ज्यादा हो सकते हैं।

इसके अलावा रक्त के थक्के किसी को ज्यादा तो किसी को कम बनते हैं हालांकि अगर आपके शरीर से कम रक्त स्त्राव हो रहा हो तो चिंता की बात नहीं है। क्रैम्प्स भी महिलाओं के शरीर की बनावट के हिसाब कम या ज्यादा मात्रा में होते हैं। किसी को असहनीय दर्द होता है।

वहीं किसी को मालूम भी नहीं चलता कि पीरियड्स चल रहे हैं। किसी को उल्टी से लेकर कमर दर्द की भी शिकायत रहती है। पीरियड साइकिल आपके हॉर्मोनल लेवल को बदलती रहती है। इस दौरान हमारे शरीर में टेस्टोरॉन का लेवल भी घटता-बढ़ता रहता है।

टेस्टोरॉन हमारे शरीर में जितना बढ़ेगा उतनी ही सेक्सुअल इच्छा भी बढ़ेगी। हर बार रक्त स्त्राव होने का मलतब पीरियड्स होना नहीं होता है है। कई बार कारण अलग होते हैं। यह सर्वाइकल कैंसर का लक्षण हो सकता है, या फिर कम उम्र में गर्भवती हो सकती है।

ऐसे में डॉक्टर की सलाह लें।
आपकी पीरियड साइकिल के दौरान कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आपके प्रेग्नेंट होने की ज्यादा संभावना रहती है और कुछ दिनों संभावना कम होती है लेकिन आपकी साइकिल के दौरान ऐसा कोई समय नहीं है जब आपके गर्भवती होने की संभावना न के बराबर हो।

हर महीने पीरियड्स हों ऐसा भी जरूरी नहीं है क्योंकि जिनकी साइकिल की अवधि पैंतीस -छतीस दिन हो उन्हें हर महीने पीरियड्स नहीं होते हैं लेकिन जिनकी साइकिल की अवधि लंबी होती है उनके गर्भवती होने संभावना भी उतनी ही होती है जितनी हर महीने होने वाले पीरियड्स वाली महिला की होती है।