माल्या के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाया भारत -जज ने सबूत देने में देरी पर लगाई लताड़

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लंदन । वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट कोर्ट की चीफ मैजिस्ट्रेट एमा अर्बथनट को पता चला कि भारत सरकार की ओर से साक्ष्य मुहैया कराए जाने में देरी हो रही है, तो उन्होंने मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद 6 जुलाई तय कर दी। भारत की ओर से ऐरन वाटकिंस ने यह कहते हुए अपना पक्ष रखा कि क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) को भारत से बाकी साक्ष्य पाने और इनकी समीक्षा करने के लिए और तीन से चार सप्ताह चाहिए। इस पर चीफ मैजिस्ट्रेट अर्बथनॉट ने पूछा, ‘क्या भारतीय प्रतिक्रिया देने में सामान्यतया फुरतीले होते हैं? उन्होंने अब तक छह महीने बिता दिए और पिछले छह सप्ताह से हमें आगे कुछ भी नहीं दिया गया है।

‘ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर अब भी साक्ष्य मिलने की कोई उम्मीद नहीं है तो अप्रैल 2018 में (पूरी सुनवाई की) संभावना है। अगर हमारे पास सबकुछ होगा तो यह (आखिरी सुनवाई) दिसंबर में हो सकती है।’ वाटकिंस ने कहा कि इस केस को लेकर भारत के साथ बहुत करीबी से काम हो रहा है और प्राप्त सबूत ‘अव्यावहारिक नहीं’ हैं।

कोर्ट ने माल्या को 6 दिसंबर तक सशर्त जमानत देते हुए 6 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी। उस दिन भी मंगलवार की ही तरह सुनवाई होगी और तब कोर्ट देखेगा कि सारे साक्ष्य मिल चुके हैं या नहीं। माल्या को कहा गया है कि उन्हें 6 जुलाई की सुनवाई के दौरान मौजूद रहने की जरूरत नहीं है। बाद में माल्या ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करता हूं और मैं उन्हें खारिज करता रहूंगा।’

यह दावा करते हुए कि लोन का पैसा दूसरी जगह नहीं लगाया गया, माल्या ने कहा, ‘आप एक अरब पाउंड्स का सपना देखते रहिए। आप तथ्यों के बिना कुछ भी साबित नहीं कर सकते।’ कोर्ट में माल्या का पक्ष रख रहे बेन वाटसन ने कहा, ‘हमें भारत सरकार से अब तक आखिरी सबूत नहीं मिला है।’ उन्होंने कहा कि छह सप्ताह पहले ही साक्ष्य देने का आग्रह किया गया था।

वाटसन ने सुनवाई को 2018 के वसंत तक टालने की वकलात करते हुए कहा, ’31 जनवरी से ही इसकी शुरुआत हुई और अब जून का महीना है, फिर भी हमें कुछ नहीं मिला है।’ उन्होंने कहा, ‘प्रत्यर्पण का दूसरा आग्रह भी आ चुका है, जिसे हमने अब तक नहीं देखा। इससे मामले में अनिश्चितता बढ़ती है।’

इस पर क्राउन प्रॉसिक्युशन ने कहा, ‘प्रत्यर्पण का दूसरा अग्रह नहीं किया गया है। बचाव पक्ष ने सेकंड रिक्वेस्ट की मांग की थी। दरअसल, उन्हें लगता है कि भारत सरकार सेकंड रिक्वेस्ट समिट कर सकती है, लेकिन अभी इस पर विचार के लिए कुछ ठोस नहीं है।’

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