मंहगी पड़ेगी जीएसटी दरों के साथ गड़बड़ी लागू करने पर रहेगी कड़ी नजर

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नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को पूरे देश में एक जुलाई 2017 से लागू किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद धांधली को रोकने निगरानी की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है। खास तौर व्यापारी जो जीएसटी की दरों में कमी का फायदा आम जनता को नहीं देते हैं उनसे तो पूरी सख्ती से निपटने की तैयारी है। हाल ही में आयोजित वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में इस उद्देश्य से एक राष्ट्रीय एंटी प्रोफिटयिरंग प्राधिकरण के निर्माण के मसौदे का प्रारूप प्रस्तावित किया है। शीघ्र हीं जीएसटी परिषद की बैठक में फैसला होने की उम्मीद है। प्रस्ताव में कहा गया है कि जीएसटी की आड़ में लाभ कमाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए जो एक तरह से आम ग्राहकों के हितों की रक्षा करने का भी काम करेगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित निकाय एक कानूनी बॉडी की तरह ही काम करेगा जिसे शिकायत सुनने और सजा सुनाने का अधिकार होगा। अगर किसी ग्राहक को यह लगता है कि उससे जीएसटी की ज्यादा दर वसूला गया है तो वह इस व्यवस्था के तहत शिकायत कर सकता है। प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित व्यक्तियों को समन भेज कर बुला सके और शिकायत सही पाये जाने पर ग्राहकों के पक्ष में फैसला सुनाये। यह फैसला वसूली गई अतिरिक्त राशि को वसूलने या ग्राहकों को हुई हानि की भरपाई करने की हो सकती है। प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ सिर्फ उच्च न्यायालयों में ही अपील की जा सकेगी। इसे जीएसटी कानून की धारा 70 के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को समन करने का अधिकार होगा। प्राधिकरण में केंद्र के साथ ही राज्यों के अधिकारी या प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक परिषद की तरफ से यह भी प्रस्ताव किया गया है कि प्राधिकरण को जांच पड़ताल करवाने का भी अधिकार होगा। जांच पड़ताल ये किसी केंद्रीय या राज्य की एजेंसियों से करवा सकेंगे। माना जा रहा है कि सरकार यह तय करेगी कि किस तरह की एजेंसियों से जांच करवाई जा सकती है।

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