भोपाल अन्नदाता को मनाने गांधीगिरी के रास्ते पर सीएम शिवराज

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– तमाम बड़े नेताओं के साथ उपवास पर बैठे | भोपाल । पिछले एक सप्ताह से प्रदेश में अन्नदाता अपने हक के लिए सड़कों पर उतरा हुआ हैं, उनकी इस लड़ाई में पिछले दिनों 6 किसानों की गोली लगने से मौत हो गई, तो वहीं उग्र हो रहे इस आंदोलन को शांत करने के लिए प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने गांधीगिरी का रास्ता अपनाया है। मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के कारण में राज्य में बिगड़े हालात को संभालने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान शनिवार से उपवास पर बैठ गए हैं। सीएम ने राज्य में शांति बहाली तक उपवास करने का फैसला किया है। सीएम शिवराज शनिवार से भोपाल के दशहरा मैदान में लोगों से सीधे मुलाकात करेंगे। सीएम शिवराज के इस उपवास के लिए राज्य बीजेपी के तमाम बड़े नेता और मंत्री दशहरा मैदान पहुंचे हुए हैं। मंच पर सीएम की पत्नी साधना सिंह, वरि… बीजेपी नेता बाबूलाल गौर, प्रभात झा समेत मंत्रिमंडल के कई सदस्य हैं। वहीं दूसरी तरफ शिवराज सरकार में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि किसानों का कर्ज माफ नहीं होगा। उपवास पर बैठने के बाद शिवराज ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के किसानों की हमदर्द है। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हमारे एमपी में आग मत लगाओ। बच्चों के हाथों में पत्थर थमा दिए गए। आंदोलन तभी जायज जब सरकार बात नहीं करे। हम तो बात करने के लिए तैयार हैं।’ उन्होंने कहा, ‘किसानों को लाभकारी मूल्य देना मध्य प्रदेश की धरती पर सुनिश्चित कर दिया जाएगा। किसान और उपभोक्ता के बीच बिचौलिए को खत्म कर दिया जाएगा। सरकार केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद करेगी। हमारी सरकार का लक्ष्य प्रदेश और जनता का विकास है। हमारी सरकार के दौरान राज्य की 40 लाख एकड़ जमीन में सिंचाई की सुविधा पहुंचाई गई।’
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मालवा को रेगिस्तान बनने से बचाया गया। शिवराज ने कहा, ‘मालवा इलाके में नर्मदा का पानी ले जाया गया। किसान दूसरों की बात में नहीं आएं। जब-जब किसानों पर संकट की घड़ी आई मैं उनके बीच गया। हमने किसानों को बिजली दी। किसानों से प्याज खरीदा।’ उन्होंने कहा, ‘इस बार राज्य में फसलों की बंपर पैदावार हुई है। जब-जब पैदावार ज्यादा होती तो फसलों की कीमतें गिरती हैं। इस बार भी गेहूं, धान, सोयाबीन, आलू, प्याज की बंपर पैदावार हुई है। अन्न के भंडार भर गए हैं। हमने फैसला किया है कि प्याज उत्पादन करने वाले किसानों से प्याज 8 रुपये प्रति किलो खरीदा जाएगा। 10 जून से तुअर (अरहर) की खरीद 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किया जाएगा। मूंग, उड़द की भी सरकारी खरीद की जाएगी। राज्य सरकार किसानों के पसीने को बेकार नहीं जाने देगी।’
उधर राज्य के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि सूबे के किसानों का कर्ज माफ नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘किसानों से हमने ब्याज नहीं लिया है। ऐसे में राज्य में किसानों का कर्ज माफ नहीं होगा।’ उन्होंने राज्य में हुई हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। बता दें कि मंगलवार को मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस फायरिंग में आंदोलन कर रहे 5 किसानों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हुए थे। शुरुआत में सरकार ने किसानों की मौत के पीछे पुलिस फायरिंग की खबरों को नकारा, लेकिन बाद में सरकार ने यह बात मानी।
उधर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व मध्य प्रदेश के केंद्रीय मंत्रियों को राज्य में भेजने पर विचार कर रहा है ताकि किसानों के गुस्से को काबू में किया जा सके। स्थानीय नेताओं के प्रति किसानों में गुस्से को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व थावर चंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे कद्दावर नेताओं को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए भेजने पर विचार कर रहा है। गहलोत शनिवार और रविवार को मंदसौर में एक कबीरपंथी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। केंद्र गहलोत को अगले सप्ताह के शुरू में प्रभावित इलाके का दौरा करने को कह सकता है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा विक्रम वर्मा जैसे लगभग रिटायर हो चुके नेताओं को भी स्थिति को सुधारने के लिए आग्रह किया जा रहा है। पार्टी इस निष्कर्ष पर भी पहुंची है कि युवाओं में रोजगार की कमी और किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिलना भी इस आंदोलन का मुख्य कारण है।