भावुक दृश्यों को देखकर रोना मजबूती की निशानी 

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कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग फिल्मों के भावुक दृश्यों को देखकर अपने आप पर काबू नही रख पाते और रोने लगते हैं। लेकिन यदि आपके साथ भी ऐसा होता है तो समझिए आप अंदर से काफी मजबूत हैं। हालांकि इसे हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण देखें तो यह व्यक्ति के हार्मोन्स के स्तर पर निर्भर करता है। कई लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि वे फिल्में देखते हुए कई बार भावनात्मक दृश्यों को देखकर रोने लगते हैं। अकेले मूवी देखते हुए कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कि किसी भी दृश्य पर सहज बने रहते हैं। दरअसल यह बात सबको पता होती है कि जो फिल्म हम देख रहें हैं वह वास्तविकता से कोसो दूर है फिर भी यदि आप अपनी भावनाओं को काबू नही कर पाती हैं तो समझिए कि आप में ये गुण हो सकते हैं।

सहानुभूति है आपमें

जो लोग भावुक होकर रोने लगते हैं, उनके अंदर सहानुभूति का गुण होता है। व्यक्ति के अंदर सहानुभूति का गुण तभी हो सकता है, जब वह कुछ स्पेशल हो। ज्यादातर लोग बिना सहानुभूति लिए पैदा होते हैं। उन्हें पता ही नहीं होता है कि दूसरों के दर्द या भावनाओं को किस तरह से समझा जाए। सहानुभूति का अभाव जीवन को नीरस बना देता है। जब आप दूसरों को समझने का प्रयास करते हैं तो और मजबूत बन जाते हैं।

धड़कता है दिल

आप मूवी में दिखाए जाने वाले चरित्र के साथ मानसिक रूप से संबंध स्थापित कर लेती हैं और उसकी परवाह करने लगती हैं। यहां तक कि रोने भी लगती हैं। इसके असल मायने हैं कि आपका दिल दूसरों के लिए धड़कता है। अक्सर दिल दूसरों के लिए अपने आप टूटता भी है।

भावुक होना कमजोरी नहीं ,फिल्म देखते समय

मूवी के दौरान रोने का एक कारण यह भी है कि कई बार फिल्म में किसी बात या चरित्र को इतनी खूबसूरती से पेश किया जाता है कि आपकी आंखों से बरबस ही आंसू आ जाते हैं। रोना किसी इंसान की कमजोरी नहीं हो सकता। रोते हुए आप सबसे निर्मल होती हैं। आपके मन में छिपी हुई भावनाएं आसानी से बाहर निकल जाती हैं।