भारत समेत कई देशों में बढ़े ड्रग रजिस्टेंट टीबी के मामले

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नई दिल्ली । तपेदिक (टीबी) हालांकि एक बेहद खतरनाक बीमारी है, लेकिन शुरुआती स्थिति में पता चलने पर इसका इलाज संभव है। हाल के दिनों में दवा प्रतिरोधी टीबी के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है अगर समुचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो 2040 तक भारत में दवा प्रतिरोधी टीबी की स्थिति भयावह हो जाएगी।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो दशक में रूस, फिलीपींस और दक्षिण अप्रीका में भी ऐसे ही हालात पैदा हो सकते हैं। दवा प्रतिरोधी टीबी को लेकर कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक, 2040 तक रूस में टीबी के एक तिहाई मामले दवा प्रतिरोधी टीबी के सामने आएंगे। इसकी तुलना में भारत और फिलीपींस में हर 10 में एक और दक्षिण अप्रीका में हर 20 में एक टीबी का मरीज दवा प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित होगा।

अध्ययन के मुताबिक इलाज के बेहतर साधन से इस बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ी है, लेकिन वर्तमान तरीके इस भयावह स्थिति को टालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस संबंध में और अधिक शोध की जरूरत है। समय से टीबी का पता चलना और इलाज बीच में छोड़ देने वाले मरीजों की संख्या कम करना बेहद जरूरी कदम हैं। दवा प्रतिरोधी टीबी वह होती है, जिस पर उपलब्ध दवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे मरीजों का इलाज ज्यादा मुश्किल होता है। एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल और टीबी का इलाज बीच में छोड़ने के कारण यह स्थिति पैदा होती है। सन् 2000 में रूस में 24.8 फीसद, भारत में 7.9 फीसद, फिलीपींस में 6 फीसद और दक्षिण अप्रीका में 2.5 फीसद मामले दवा प्रतिरोधी टीबी से जुड़े थे।
अमेरिका में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के आदित्य शर्मा ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए समग्र प्रयास की जरूरत है। दवा-प्रतिरोधी टीबी के नए मामले मुंबई में भी सामने आ चुके हैं। चिंताजनक बात यह है कि यह मामले पांच साल पहले सामने आ चुके हैं। भारत जैसे अत्यधिक आबादी वाले देश में हमेशा टीबी का खतरा रहता है। 2012 में ही दवा प्रतिरोधक टीबी के सामने आने से साबित होता है कि इस रोग से लड़ने में सरकार की तैयारी की क्या स्थिति है। उस समय माहिम के हिंदुजा हॉस्पिटल ने 12 मरीजों के नमूनों में पूर्ण रूप से दवा प्रतिरोधी टीबी (टोटली ड्रग रेजिस्टेंट) का पता लगा था।

टीबी यानी टय़ूबरक्लोसिस को कई नामों से जाना जाता है। इसे क्षय रोग, तपेदिक, राजयक्ष्मा, दण्डाणु इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। टीबी एक संप्रामक बीमारी है और इससे ग्रसित व्यव्ति में अत्यधिक शारीरिक कमजोरी आ जाती है। साथ ही उसे कई गंभीर बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। टीबी सिर्फ फेफड़ों का ही रोग नहीं है, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी यह प्रभावित करता है।