बैंक में खत्म हो रही है कैशियर की नौकरी, एटीएम से होगा सारा काम

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वॉशिंगटन । आज के तकनीकी विकास के दौर में बैंकों में पैसों की निकासी, जमा करना तथा पासबुक प्रिंटिंग का काम मशीन के जरिए होता है। इसकी वजह से जहां बैंकों में ग्राहकों की लगने वाली लंबी कतारे खत्म हुई हैं वहीं वहीं वहां पर काम कर रहे कैशियर और बाबू का काम कम हो गया है। अमेरिका में सबसे बड़े बैंक अपने हजारों एटीएम की क्षमताओं और फिजिकल अपीरियंस को अपडेट करने के लिए लाखों रुपए निवेश कर रहे हैं। इस महीने एटीएम की शुरुआत के 50 साल पूरे हो रहे हैं। एटीएम में संभावनाएं अभी अनंत हैं, लिहाजा रिटेल शाखाओं में मौजूद ग्राहक दिन-प्रतिदिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए मशीनों के साथ अधिक समय व्यतीत करेंगे। बैंक शाखाकर्मी काउंटर के पीछे से हटकर अधिक जटिल लेन-देन जैसे घरों या छोटे व्यवसायों के लिए ऋण देने के काम में लगेंगे। साल 2018 तक एटीएम की एक नई लहर चलेगी, जिसमें डिजिटल रूप से सक्षम टैबलेट दिखने आम हो जाएंगे।

ये उन सभी सेवाओं को मुहैया करा सकेंगे, जो अभी कैशियर देते रहे हैं। इसके साथ ही नई क्षमताओं की पेशकश जैसे आपके फोन पर नकद निकासी की सुविधा मुहैया कराना, जिसे आप आस-पास के किसी भी एटीएम से पूरा कर सकेंगे। बैंकों ने एटीएम को और अधिक लचीला बनाया है, जिनसे एक डॉलर, पांच डॉलर और 10 डॉलर की राशि भी निकल सकती है। इसके साथ ही कार्डलेस लेन-देन की शुरुआत भी है, जिसमें ग्राहक अपने फोन से अधिक सुरक्षित रूप से लेन-देन कर सकता है। जेपी मॉर्गन चेस अमेरिका में 16,300 से अधिक एटीएम और 5,300 शाखाओं के नेटवर्प मुहैया कराता है। उसका दावा है कि साल 2014 से 2016 तक टेलर के जरिये होने वाले उसके लेन-देन में 25 फीसद तक की गिरावट आई है। ग्राहकों ने 90 फीसद निकासी और 60 फीसद राशि जमा करने के लिए एटीएम का इस्तेमाल किया। हालांकि, चेक कैश कराने का काम अभी भी टेलर पर निर्भर हैं।