बैंकों के एक और विलय पर विचार कर रही सरकार

0
6

नई दिल्ली । भारतीय स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंकों का विलय किए जाने के बाद केंद्र सरकार अब चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक बैंकों के एक और विलय को मंजूरी देने पर मंथन कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मार्च तक कुछ कई छोटे बैंकों को बैंक ऑफ बड़ौदा, साउथ इंडियन बैंक जैसे बड़े बैंकों में मिलाने की मंजूरी दी जा सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली कई बार कह चुके हैं कि मोदी सरकार देश में वैश्विक स्तर के चार-पांच बड़े बैंक बनाना चाहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे बैंकों का बड़े बैंकों में विलय हो जाने से बैंकों का प्रदर्शन और उनकी विशेषज्ञता सुधरेगी और वे बड़े विदेशी बैंकों का मुकाबला करने में सक्षम हो पाएंगे। साथ ही वे भारतीय कंपनियों के विस्तार और अधिग्रहण को जरूरी सहारा भी दे सकेंगे। वित्त मंत्रालय के एक वरि… अधिकारी ने कहा कि ‘बैंकों का सुदृढ़ीकरण जरूरी है पर इस बारे में कोई भी फैसला सही समय पर लिया जाएगा। यदि विलय से बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) को कम करने में मदद मिलेगी तो इस फैसले को मंजूरी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय को मंजूर करते वक्त देश के आर्थिक माहौल और कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) सहित विभिन्न नियामकों की भी मंजूरी लेनी होगी। वित्त मंत्रालय ने बैंकों के विलय के अगले दौर की संभावना जांचने के लिए नीति आयोग और वैश्विक सलाहकार संस्थानों से मदद ली है। कहा जा रहा है कि नीति आयोग की रिपोर्ट से अगले दौर के सुदृढ़ीकरण का खाका खींचने में मदद मिलेगी। गत एक अप्रैल को भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय कर दिया गया था। इसके बाद से एसबीआई दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों की सूची में जगह बनाने में कामयाब हो गया है।