बार-बार ये स्वास्थ्य परेशानियां हों, तो समझें अवरुद्ध है आपका विशुद्धि चक्र

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विशुद्धि चक्र: विशुद्धि चक्र शरीर के सात चक्तों में पांचवां चक्र है। इसे गला चक्र भी कहते हैं। यह ग्रेव नलिका के पास (गले के ठीक पीछे) स्थित होता है और इससे श्वास नली, आवाज, कंधे जुड़े होते हैं। स्वर ग्रंथि से यह सीधे जुड़ा होता है इसलिए सबसे ज्यादा इससे नासिका और स्वर ही प्रभावित होते हैं।

अगर इस चक्र में व्याधि आए: अत: अगर इस चक्र में व्याधि आए या यह अवरुद्ध हो जाए तो शरीर के इन हिस्सों से संबंधित परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं; मसलन बोलने में परेशानी, कंधे में दर्द, अस्थमा की परेशानियां या श्वास संबंधित परेशानियां आदि। योगशास्त्र में इसकी पहचान 16 पंखुड़ियों के बैंगनी कमल के रूप में की गई है।

ब्लू प्राण शक्ति: अध्यात्म में इसे ‘ब्लू प्राण शक्ति’ भी कहा गया है। अध्यात्म में इसे आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना गया है इसलिए इस चक्र से जुड़े लोग या जिसने इस चक्र को जाग्रत किया हो वह मन और आत्मा से शुद्ध होता है और केवल इसी के विषय में सोचता है। ऐसे लोगों की पहचान करना भी आसान है। ये बहुत अच्छे और प्रभावशाली वक्ता होते हैं।

मानसिक शक्ति के लिए: इस चक्र के जागरण से व्यक्ति को अभूतपूर्व मानसिक शक्ति का एहसास होता है। ऐसे व्यक्तियों को भूत और भविष्य का ज्ञान भी होता है। इनके मन में शांति होती है और ये विचारों के जाल से पूर्णतया मुक्त रहते हैं।

मानसिक शक्ति के लिए: इनके मन में किसी प्रकार की उलझन नहीं रहती, ये जो भी सोचते हैं भावना से मुक्त होकर सोचते हैं और जगत कल्याण इनका एकमात्र लक्ष्य बन जाता है। ये मुख्य रूप से दार्शनिक कहे जा सकते हैं।

अवरुद्धि की निशानियां: अगर विशुद्धि चक्र में अवरोध उत्पन्न हों तो व्यक्ति को नासिका और स्वर संबंधी परेशानियां सबसे पहले उत्पन्न होती हैं। इसलिए अगर आपमें आगे बताया एक भी लक्षण है तो समझें आपको अपने विशुद्धि चक्र की ब्लॉकेज समाप्त करने की आवश्यकता है।

लक्षण: – गले में लगातार परेशानियां – आए दिन खराश उत्पन्न होना – लगातार सिर दर्द का होना – दातों की परेशानियां – मुंह का अल्सर या छाले – थाइरॉयड – गर्दन दर्द – टीएमडी (मुंह के जोड़ों में पैदा हुई परेशानी जिसमें मुंह खोलने में व्यक्ति को परेशानी होती है और वह कुछ भी खा नहीं पाता)

सामाजिक परेशानियां: विशुद्धि चक्र की परेशानियां अधिक बढ़ जाने पर यह भी संभव है कि उपर्युक्त में कोई भी लक्षण नजर ना आएं लेकिन यह मानसिक या भावनात्मक स्तर पर आपको गहराई से प्रभावित करे। ऐसे में कोई शारीरिक समस्या ना होकर मानसिक और साइकोलॉजिकल परेशानियां होने लगती हैं।

सामाजिक परेशानियां: इसलिए अगर आपको डेली लाइफ में आगे बताए ये लक्षण दिखें तो समझें कि आपका विशुद्धि चक्र पूरी तरह अवरुद्ध है और आपको अपनी समस्याएं दूर करने के लिए एकमात्र सहारा यही लेना होगा कि इस चक्र को जाग्रत करें। – अचानक बोलने की अक्षमता पैदा होना या किसी से बात करने या अपनी बात रखने में भय महसूस होने लगना

सामाजिक परेशानियां: अचानक आपको लगे कि आपमें शर्मिंदगी के भाव आने लगे हैं और आप हर किसी से हिचक के साथ मिलते-जुलते या बात करते हैं – आप लोगों से कटने लगें हों – स्वभाव से रचनात्मक होने के बावजूद आपको लगे कि आपमें इसका ह्रास होने लगा है या आप अपनी रचनात्मकता का पूरा और सही जगह पर उपयोग नहीं कर पा रहे हैं – आपको लोगों से जुड़ने में समय लगे और मन में एक अनजाना

सामाजिक परेशानियां: मन में अचानक पैदा हुए इन भावों के कारण व्यक्ति में क्रोध, अधीरता, तुनकमिजाजी, दूसरों पर हावी होने की प्रवृत्ति भी आ सकती है। यह इन अक्षमताओं के कारण स्वत: पैदा हुए भाव हो सकते हैं या यह भी हो सकता है व्यक्ति अचानक आई अपनी इन कमियों को छुपाने के लिए ऐसा करे।

सामाजिक परेशानियां: बोलने में पैदा हुई परेशानी और अपनी बातें ना रख पाने के कारण भी ये बहुत हद तक खुद को अत्यंत निरीह भाव में पाते हैं। ऐसे में सामाजिक रूप से लोगों से मिलने, भीड़ या ग्रुप में बोलने में डरने लगते हैं और इनमें एक झुंझलाहट का भाव उत्पन्न होता है। परिणाम्स्वरूप इनका सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

कैसे करें सुधार: पुरानी बातों का त्याग: मन में कोई बात हो, कोई दबी हुई भावना, आत्मग्लानि या क्षोभ या कोई दुख हो तो उसे बिसूरने की कोशिश करें। वह तरीका ढूंढें कि कैसे आप इन्हें अपने दिल और दिमाग से बाहर कर सकते हैं। विचारों, दुख और ग्लानि की यह भीड़ आपकी विशुद्धि चक्र को जकड़ कर रखती है और इसे ऊर्जा प्रवाह से रोकती है।

रोना: कई बार रोना भी रोगों की एक कारगर दवा होती है। इसलिए जब आपको लगे कि कोई भी उपाय कार्य ना कर रहा हो तो रो लें। रोना कोई साधारण अवस्था नहीं होती, आवाज के साथ मन के भावों को महसूस करते हुए रोने की यह प्रक्रिया आपके मन के सभी भारों को बाहर कर देता है और आपका विशुद्धि चक्र पूरी तरह बाधा रहित हो जाता है।

व्यावाहारिक अभ्यास: बोलने में परेशानी उत्पन्न हो तो अकेले में जोर-जोर से बोलने का अभ्यास करें। किसी करीबी से अपने मन की बात करें और उसके सामने बोलने की प्रैक्टिस करें।

रंग-चिकित्सा: विशुद्धि चक्र का रंग ब्लू माना गया है। इसलिए इस रंग को अपने जीवन में प्राथमिकता से स्थान देना बहुत हद तक आपके इस चक्र को बाधा-मुक्त कर सकता है। नीले रंग का जितना अधिक अपने जीवन में प्रयोग कर सकते हैं, करें। जैसे नीले रंग के कपड़े, पर्दे, घर के सजावटी सामान, फूल आदि इस रंग के लाएं।

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