पेट के रोगों को दूर करने के ये उपाय आपको बहुत लाभ देंगे

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शरीर के सभी हिस्से किसी ना किसी रूप में बहुत महत्तवपूर्ण होते हैं, लेकिन अकेला पेट ऐसा अंग है जो कि खराब होकर पूरे शरीर को परेशान कर सकता है । पेट के रोगों के हो जाने पर शरीर के दूसरे अंगों की सामान्य क्रियाएं किसी ना किसी रूप में प्रभावित होने ही लगती हैं । शरीर को रोगों से मुक्त बनायें रखने के लिये पेट का रोगमुक्त रहना बहुत ही जरूरी होता है । इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बता रहे हैं जिनको अपना कर आप पेट के रोगों को अपने से दूर रख सकते हैं ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर एक : अदरक के छोटे छोटे टुकड़े करके उनके ऊपर सेंधा नमक या काला नमक छिड़ककर रोज एक या दो बार खाने से पेट में अफारा, कब्ज, वायु विकार आदि रोग दूर होते हैं और भूख भी खुलकर लगने लगती है । इसके सेवन के बाद यदि गरम पानी पिया जाये तो पेट की कठोरता भी दूर होती है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर दो : ज्यादा खा लेने से पेट में दर्द होने लगा है तो एक कप गरम पानी में 2 ग्राम काला नमक घोलकर पीने से खाया हुआ जल्दी पच जाता है और पेट का दर्द ठीक हो जाता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर तीन : ईसबगोल की भूसी 4 ग्राम को सुबह और शाम के समय पानी अथवा दूध के साथ सेवन करने से कब्ज आदि तमाम तरह के पेट के रोगों से मुक्ति मिल जाती है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर चार : पेट के अनेक रोगों के लिये कटि स्नान करने से बहुत लाभ मिलता है । जल से भरे एक बड़े टब में इतना पानी भरें कि बैठने पर आपके सीने तक आये और आपका पेट पूरी तरह से पानी में डूब जाये । एक सूती कपड़े से को गीला करके पेडू के दाहिने और से बायीं और एवं बायीं और से दाहिने और हल्के हल्के रगड़ने से पेट में खून का प्रवाह बढ़ता है जिसके फलस्वरूप आँतों की गन्दगी को बाहर निकालने की ताकत पैदा हो जाती है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर पाँच : हींग का प्रयोग पेट के रोगों में बहुत लाभकारी है । हींग गरम पानी में मिलाकर नाभि के चारों तरफ लेप करने से पेट दर्द, अफारा और डकार में लाभ होता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर छः : पेट की बीमारियों में नीम्बू का रस जितना गुणकारी होता है, चाय उतनी ही ज्यादा नुक्सानकारी होती है । नीम्बू रोज सुबह गुनगुने अथवा ताजे पानी में घोलकर लेने से पेट और गुर्दों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है । इसके विपरीत चाय के सेवन से पेट की आन्तरिक त्वचा खराब होती है और रोग पैदा करती है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर सात : 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण को एक कप पानी में रात भर के लिये भिगोकर रख देने और और सुबह उठकर उस पानी को पीने से पेट की बीमारियों में लाभ मिलता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर आठ : जामुन के पके फलों से बना सिरका रोज तीन से दस मिलीलीटर की मात्रा में पानी के साथ मिलाकर लेने से उदरशूल, मंदाग्नि, और तिल्ली बढ़ जाने जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर नौ : जायफल का चूर्ण एक ग्राम की मात्रा में लेकर, आधा कप गुनगुने पानी के साथ रोज सवेरे सेवन करने से बार बार पेट फूलने, पतले दस्त लगने, उदर शूल और अफारा आने की समस्या के रोगियों के लिये बहुत ही ज्यादा लाभकारी सिद्ध होता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर दस : बेलपत्थर का फल पेट के रोगों के लिये बहुत ही लाभकारी होता है । पके बेलपत्थर के फल को सुखाकर चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को रोज सुबह और शाम के समय 5-5 ग्राम लेकर गरम पानी के साथ सेवन करने से पेट की सभी बीमारियों और खासतौर पर पतले दस्त होने की समस्या में बहुत लाभ मिलता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर ग्यारह : यदि पेट की कमजोरी के कारण खाना खाने के तुरन्त बाद दस्त जाने का कष्ट होता है तो भोजन के बाद 5-6 ग्राम धनिये के दाने चबाने से यह समस्या समाप्त हो जाती है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर बारह : साफ अजवाइन 50 ग्राम, खाने का सोडा 10 ग्राम, और भुना जीरा 25 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बनाकर काँच की टाईट शीशी में भर कर रख लो । खाना खाने के बाद इस चूर्ण का 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट की ऐंठन-मरोड़, अफारा, भारीपन, डकार आना आदि समस्याओं में बहुत लाभ मिलता है ।

पेट के रोगों को दूर करने का उपाय नम्बर तेरह : पेट के रोगों में गरम, खट्टे और तीखे पदार्थों का सेवन ना करें । दूध-दही का सेवन चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करना चाहिये । चाय-कॉफी आदि गरम पेय पीकर तेज कदमों से नही चलना चाहिये । चावल, उड़द, राजमा, काबुली चने, चने की दाल, आलू, और दूसरी वादी युक्त चीजों का सेवन उचित नही रहता है । आहार में सुपाच्य तथा तरल पदार्थों के सेवन को प्राथमिकता दें ।

पेट के रोगों के समाधान के लिये इस लेख में दिये गये सभी प्रयोग हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं । फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के बाद ही इन प्रयोगों को अपनाने की हम आपको सलाह देते हैं । ध्यान रखें कि आपका चिकित्सक ही आपके रोग और शरीर को सबसे बेहतर समझता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नही होता है ।

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