देशी चना, देशी लोगों के लिये अमृत, नही खाते हो तो खाना शुरू कर दोगे यह लेख पढ़कर

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चना प्राचीन काल से ही भारतीय महाद्वीप में एक प्रमुख अनाज के रूप में सेवन किया जाता रहा है । अनाज के अलावा चने के बहुत से औषधिय उपयोग भी हैं और घरेलू प्रयोग भी । ऐसे ही कुछ घरेलू प्रयोगों के बारे में जानिये इस पोस्ट में प्रकाशित आयुर्वेद, मेरठ के सौजन्य से ।

शक्तिवर्धक चना : चना शक्ति का शायद सबसे सस्ता और सर्वसुलभ भण्डार है । चने में समाहित शक्ति को प्राप्त करने के लिये 50 ग्राम चने लेकर उन्हें पूर्णिमा की रात में एक लीटर पानी में भिगोकर बारीक सूती कपड़े से ढक कर चंद्रमा की रोशनी में पूरी रात के लिये रख दें । सुबह इस पानी को चनों के साथ ही इतना उबालें कि केवल 250 मिलीलीटर पानी ही शेष रहे । इस पानी को पीने से शरीर में बहुत शक्ति का संचार होता है । यह प्रयोग स्वस्थ वयक्ति को हर पूर्णिमा की रात को करना चाहिये ।

प्रोटीन का भण्डार चना : चना शरीर के लिये जरूरी प्रोटीन का बहुत ही अच्छा भण्डार होता है । चाहे भुना चना हो या अंकुरित अथवा उबाला हुआ, चने का प्रोटीन खराब नही होता । यदि रोज सुबह 20-50 ग्राम चने का सेवन किया जाये तो शरीर में कभी भी प्रोटीन की कमी नही होगी और बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने की शिकायत को भी दूर रखा जा सकता है ।

जलन और पेचिश में लाभकारी है चना : जिन लोगों को पेट में गर्मी के कारण जलन और बार बार पेचिश की समस्या रहती है उन लोगों को 20-30 ग्राम चनें रात को मिट्टी के बरतन में पानी में भिगोकर रखने चाहियें और सुबह के समय यह पानी खाली पेट पीना चाहिये । 10 दिन के अंदर ही पेट की गर्मी खत्म होने लगती है ।

चेहरे की झॉईयों को खत्म करता है चना : भुने चने को पीसकर उसमें शहद और हल्दी मिलाकर चेहरे पर रोज एक बार उबटन करने से चेहरे की झॉईयों की समस्या से काफी हद तक मुक्ति पायी जा सकती है ।

चने से मिलने वाले कुछ लाभों की यह जानकारी प्रकाशित आयुर्वेद, मेरठ के सौजन्य से आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा ।