दही रखे सेहत का ख्याल

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दही में केल्शियम, प्रोबोटिक्स बैक्टेरिया और अन्य पोष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसी कारण से इसे पावर फ़ूड की संज्ञा दी जाती है।

“तो दही खाइए, सेहत और उर्जा दोनों पाइए” भारतीय भोजन में दही को सदियों से ही महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता रहा है। दही का प्रचंलन तभी से शुरू हो गया था तब से गाय पाली जाने लगी थीं। इतिहास में प्रमाण मिला है कि 13 वीं सदी में जब चंगेज खान अपने विजय अभियान पर निकला था तो उसके भोजन का एकमात्र स्रोत दही ही था। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दही से शरीर को कितनी उर्जा मिलती है।

स्वाद भी पोष्टिकता भी: अगर आपके खाने में दही शामिल है यानी उस भोजन में स्वाद के साथ साथ पोष्टिकता भी है। पोष्टिक तत्वों से भरपूर दही में प्रोबाओटिक फ़ूड प्रचुर मात्रा में होता है। जिससे शरीर की हड्डियाँ मजबूत रहती हैं। शरीर की पाचन किर्या को अच्छा बनाये रखने के लिए भी दही बहुत लाभदायक मानी गयी है।

फायदों से भरपूर है दही

  • दही में बहुत से मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की सामान्य क्रियांओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक हैं। केल्शियम और फास्फोरस जैसे तत्व दही में पाए जाते हैं, जिनसे हड्डियाँ मजबूत रहती हैं।
  • दही के नियमित सेवन से मेनोपॉज की अवस्था में महिलायों को ओस्टओप्रोसिसि होने की आशंका कम होती है।
  • पोटाशियम और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत होने के नाते दही हमारे शरीर की धमनियों और रक्त शिराओं के लिए अच्छी होती है, शरीर में द्रव का प्रवाह बनाये रखती है।
  • इसमें विटामिन बी-2, बी-12 जैसे आवश्यक विटामिन होते हैं, जिनसे आँखे व् त्वचा स्वस्थ्य रहते हैं। यह अनीमिया से बचाव करती है और इसमें विटामिन डी, ई होने के कारण यह प्रजनन अंगो को सेहतमंद रखती है।
  • दही में पाए जाने वाले प्रोबिओटिक तत्वों के कारण कब्ज, डायरिया, कोलोन, कैंसर, आदि बिमारियों से बचाव होता है।
  • नियमित रूप से दही का सेवन करने पर मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में क्रोनिक केंड़ाईडल वेजेनाइटीस में आराम मिलता है।
  • दही के सेवन से भूख तुरंत शांत होती है और पेट भरे होने का एह्साह होता है। दही से मिलने वाले कैल्शियम से शरीर के फैट सेल्स से कर्टिसेल्स का उत्सर्जन कम होता है, जिससे वजन घटाना आसान हो जाता है। साथ ही एमिनो एसिड्स भी फैट घटाते हैं।
  • प्रोटीन से भरपूर दही दूध की तुलना में कहीं जल्दी पच जाती है, दही में पाए जाने वाले प्रो-बायोटिक रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ाते हैं। इससे किसी भी रोग के संक्रमण, जलन और एलर्जी आदि से बचाव होता है।
  • थकान दूर करने और उर्जावान रहने के लिए रोजाना दही का सेवन करना चाहिए। दही के नियमित सेवन से पेट और आंतो की समस्या नहीं होती हैं।
  • आज के प्रतियोगी दौर में तनाव स्वाभाविक है। इसे कम करने के लिए खाने के साथ दही जरुर लें।

क्या कहते हैं डाक्टर दही के बारे में:
दही में गुड बैक्टेरिया प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इससे कैल्शियम की आपूर्ति होती है। पेट की दिक्कतों में भी आराम मिलता है। इस मौसम में छाछ विशेष रूप से अच्छी होती है। शाकाहारी लोगो के लिए कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन बी12 कुछ हद तक दही से ही मिल जाते हैं। जो लोग नॉन वेज नहीं खाते हैं उन लोगो को दही जरुर खाना चाहिए। चूँकि इस मौसम में पसीना ज्यादा आता है, ऐसे में पानी की कमी हो जाती है। इसे देखते हुए लस्सी ले सकते हैं। वैसे दही में भी 30 फीसदी पानी होता है, इसलिए इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है।

क्या कहते हैं नुट्रीश्निस्ट:

  • दही में चीनी डाल कर खाना अच्छा नहीं होता है, यह पेट में आंव/पेचिश पैदा करता है। अगर मीठा दही खाना चाहते है तो उसमे फल मिला कर खा सकते हैं। इससे फल की प्रकृतिक मिठास मिलेगी और दही नुकसान भी नहीं करेगा।
  • अगर नमकीन दही का स्वाद चाहते हैं तो साधारण नमक की वजाय दही में काला नमक डालें। साथ ही पाचन क्रिया के बेहतर बनाने के लिए खाना खाने के बाद छाछ पीनी चाहिए, इससे पाचन अच्छा होता है।

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