ताजमहल से जुड़ा है एक हैरान करता सच

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सात अजूबे: इस दुनिया में सात अजूबे हैं जिनमें से एक आगरा का ताजमहल भी है। इसकी बनावट और सजावट काबिले तारीफ है। आगरा के ताज महल को प्यार, इश्क, मोहब्बत की निशाना माना जाता है। इसकी खूबसूरती और प्यार की छाप दुनिया पर ऐसी पड़ी है कि इसके बनने के प्रारंभ से लेकर 364 साल हो गए हैं। लेकिन लोग आज भी इसे देखने आते हैं।

अद्भुत इमारत: आगरा का ताज महल केवल पर्यटन का स्थल ही नहीं बल्कि पाठ्यक्रमों का भी हिस्सा बन गया है। इस अद्भुत इमारत का निर्माण शाहजहां ने 1653 में अपनी दूसरी बेगम मुमताज़ महल के लिए बनवाया था। शाहजहां मुमताज़ से बेहद प्यार करते थे जिसका नमूना आज हम सभी ताज महल के रूप में देख सकते हैं। ताज महल एक मकबरा है।

ताज महल: इस महल में ही मुमताज़ बेगम का मकबरा बनाया गया था।ताज महल का निर्माण करने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था।इसी तरह बुखारा जो मध्य एशिया में स्थिति है वहां से एक कारीगर बुलाया गया वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था।

ताज महल का निर्माण: विराट कद में गुम्बदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तानबुल के कारीगरों को बुलाया गया। तथा मीनारों का निर्माण करने के समरकंद से कारीगरों को बुलाया गया। इस तरह करीब 25000 से अधिक मज़दूरों ने ताज महल का निर्माण किया।

मुगल बादशाह शाहजहां: मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेगम मुमताज़ से बेइंतहां मोहब्बत करते थे इसी वजह से उन्होंने अपना मकबरा भी ताज महल में ही बनवाया। ताजमहल के मध्य में बेगम मुमताज़ महल के कब्र को रखा गया है।बेगम मुमताज़ महल सफेद मार्बल से बनाई गई है।

खूबसूरती की प्रशंसा: उनकी कब्र को काफी डिज़ाइन किया गया है।मुस्लिम परंपरा के अनुसार कब्र की विस्तृत सज्जा मन है, इसलिए शाहजहां और मुमताज़ के पार्थिव शरीर इसके नीचे तुलनात्मक रूप से साधारण, असली कब्रों में दफन हैं, जिनके चेहरे दाएं और मक्का की तरफ हैं। मुमताज़ की कब्र पर उनकी खूबसूरती की प्रशंसा लिखी हुई है।

मुमताज़ का मकबरा: शाहजहां द्वारा निर्मित ताज महल आज विश्व धरोहर है। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है। यह विश्व धरोहर के रूप में पूरे विश्व द्वारा सराहा गया ‘अति उत्तम मानवीय कृतियों’ में से एक कहलाया गया है। इस महल को मुमताज़ का मकबरा के नाम से भी जाना जाता है।

ताज महल के विभिन्न हिस्से: ताज महल की खूबसूरती उसके गुम्बद, मीनारें, छज्जे जैसे हिस्से हैं। यह परसिया राजवंश की कला तथा कई मुगल भवन गुर-ए-आमिर, हुमायूं का मकबरा, इतमद्दु-दौलाह और शाहजहां की दिल्ली की जामा मस्जिद जैसे भवन ताज महल के निर्माण कला का आधार हैं। तो आइए जानते हैं ताज महल के विभिन्न हिस्सों के बारें

मकबरा: आगरा के ताज महल का प्रमुख केंद्र है मकबरा। यहां मुमताज़ के मकबरे को विशेष तरह से सजाया गया है। यह मकबरा 42 एकड़ में फैला हुआ है और चारों तरफ बगीचें हैं। इसके तीन ओर से दीवार बनाई गई है।

गुम्बद: ताज महल के मक: बरे के शिखर पर संगमरमर के गुम्बद दिखाई देते हैं। यह गुम्बद उल्टे कलश की तरह दिखते हैं। गुम्बद पर किरीट कलश सुशोभित है यह कलश हिन्दू और फ़ारसी कला का मुख्य तत्व है।

छतरियाँ: गुम्बदों को सहारा देने के लिए इसके चारों तरफ छोटे गुम्बदों के आकार की छतरियां बनाईं गईं हैं।इनके आधार से मुमताज़ महल के मकबरे पर रोशनी पड़ती है।

शिखर: 1800 ई. में ताजमहल के शिखर गुम्बद पर स्थित कलश सोने का बना हुआ था। लेकिन अब इसे कांसे का बनवाया गया है।

मीनार: ताजमहल के चारों कोनों पर 40 मीटर ऊँची चार मीनारें हैं। जैसे मस्जिद में अज़ान देने के लिए मीनारें होती हैं, उसी प्रकार ताजमहल की मीनारों का निर्माण किया गया। इन चारों मीनारों का निर्माण इस तरह किया गया है कि यह चारों मीनारें हल्की सी बाहर की तरफ झुकी हुई हैं।

ताजमहल की इमारत: इनका बाहर की तरफ झुकाव का यह कारण बताया गया है कि इमारत के गिरने की स्थिति में यह मीनारें बाहर की तरफ ही गिरें, जिससे कि मुख्य ताजमहल की इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचें।

बाहरी सजावट: ताजमहल बहुत ही सुंदर कृति है। यह मुगल वास्तुकला का अप्रतिम उदाहरण है। इसे विभिन्न नक्काशी एवं रत्नों से जड़कर बनाया गया है।

ताज महल का निर्माण: ताज महल का निर्माण पूर्ण होते ही शाहजहां को अपने बेटे औरंगज़ेब द्वारा अपदस्थ कर, आगरा के किले में नजरबंद कर लिया गया। शाहजहां की मृत्यु के बाद उसे मुमताज़ के साथ ही दफना दिया गया। 19वी शताब्दी आते आते इसकी अवस्था जीर्ण शीर्ण होने लगी।

कीमती रत्न: अंग्रेजों ने ताजमहल से कीमती रत्न निकाल लिए। लेकिन आज भी यह स्थल पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ हर साल करीब 70-80 हज़ार पर्यटक आते हैं।