टीच फॉर ग्रीन एवं नेश्नल साइंस सेंटर ने विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों को जागरुकता का दिया संदेश दिया

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दिल्ली पर्यावरणीय शिक्षा पर काम करने वाली संस्था टीच फॉर ग्रीन ने नेश्नल साइंस सेंटर के साथ मिलकर 44वाँ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया। इस अभियान के जरिये लगभग 50 लोगों ने यूएनईपी के इस वर्ष के थीम- ‘लोगों को प्रकृति से जोड़ना’ को बढ़ावा देते हुए दिल्ली को स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने को लेकर एक साकारात्मक संदेश भी दिया।
सेमिनार में पर्यावरण के वर्तमान समय के चुनौतियों पर बात-चीत के दौरान पर्यावरणीय समस्या के समाधान पर चर्चा की गयी। टीच फॉर ग्रीन के संस्थापक अजय कुमार ने कहा कि बढ़ते हुए पर्यावरणीय समस्या का हल तभी निकाला जा सकता है, जब हर नागरिक अपनी-अपनी भूमिका तय करे। हमारी बढ़ती भौतिकतावादी प्रकृति के कारण पर्यावरण का तेजी से नुकसान हुआ है। आगे अजय ने दिल्ली में सौर-ऊर्जा के सम्भावनाओं पर बात करते हुए कहा यहां तक की हमें यह समझना होगा कि हम अगर एक लैपटॉप का एक घंटे के लिए इस्तेमाल करते है, तो 250 ग्राम कार्बन डाइअक्साइड का उत्सर्जन करते है वही हमारे एक घंटे एसी के उपयोग से लगभग 3 किलोग्राम कार्बन डाइअक्साइड का उत्सर्जन होता है।

आगे उन्होनें बताया कि हर एक नागरिक अपनी छोटे से छोटे जरुरत को पूरा करने के लिए अपने घरों पर एक साधाहरण तरिकों से टेबल लैम्प, मोबाईल चार्जर इत्यादि बना सकता है। हलांकि अक्षय-ऊर्जा को अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती लोगों मे इस तकनिक को अपनाने को लेकर प्रशिक्षण का अभाव है। जिसके चलते आज भी भारत के 30 फीसदी आबादी अंधेरे में जीवन गुजारने को लेकर विवश है, जबकि 75 फीसदी आबादी गांव में निवास करती है। इन समस्यों को दूर करने के लेए टीच फॉर ग्रीन लोगों से अपील करती है कि इस विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह संकल्प करे कि हम ऊर्जा को व्यर्थ में ना खर्च करे और अपने छोटे-छोटे कामों के लिए अक्षय-ऊर्जा का प्रयोग करे।
इस अवसर पर नेश्नल साइंस सेंटर के संयोजक कैलाश कुमार ने कहा कि आने वाले पर्यावरणीय समस्याओं से लड़ने के लिए स्कूल स्तर पर शिक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा व्यवाहारिक बनाने की जरुरत तभी हम आने वाले समय में मानव अस्तिव को बचा सकते है। इसके लिए बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी साथ आने की जरुरत है। तभी हम पर्यावरण के चुनौतियों से लड़ सकते है।