जानिए योग क्या है और इसके समस्त प्रकारों का वर्णन

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योग हमारे ऋषि मुनियों द्वारा दिया गया एक अनमोल उपहार है| यह एक प्राचीन चिकित्सीय पद्धति है, जो आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बनाने में सहायक है| योग के अभ्यास से व्यक्ति का शारीरक और मानसिक स्वास्थय सुधरता है बसर्ते इसे सही तरीके से किया जाये| योग का अभ्यास आपको आध्यात्म से भी जोड़ता है|

कुछ लोग कहते है की शरीर को तोडना मरोड़ना योग है, यह एक प्रकार का व्यायाम है, किन्तु यह सत्य नहीं है| योग के अंतर्गत कई चीज़े है जैसे भक्ति, कर्म, ध्यान आदि|  यह आपको पुनर्यौवन प्रदान करने वाला आनंदमय उपहार है|

योग की खासियत यह है की इसे करने के लिए आपको किसी भी साधन की आव्यशकता नहीं होती है| इसलिए इसे हर व्यक्ति कर सकता है, चाहे वो गरीब हो या धनवान| साथ ही इसे हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है| बच्चे हो या बूढ़े, हर कोई योग को करके इसके फायदों से लाभान्वित हो सकता है| आइये आज के लेख में विस्तार से जानते है

योग का मतलब क्या है

योग का अभ्यास आपको तन और मन से धनि करता है| जो लोग चाहते है की उनकी आयु लम्बी हो और वो पूरा जीवन स्वस्थ होकर बिताये, उन्हें योग का अभ्यास जरुर करना चाहिए| किन्तु जैसे किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए हम उसमे नियम बनाते है, उसी तरह योग में भी नियम है| योग अभ्यास के जरिये लाभ पाने के लिए उसके नियमो को जरुर जान लेना चाहिए| यहाँ से आप योग के नियम जान सकते है|

“योग” शब्द की बात करे तो भले ही यह केवल दो शब्दों से मिलकर बना है| किन्तु इसके अन्दर कई चीजों का समावेश है| इसके कई प्रकार है:

  • ज्ञान योग
  • कर्म योग
  • भक्ति योग
  • राज योग
  • अष्टांग योग
  • हठ योग
  • लय योग
  • ध्यान योग
  • क्रिया योग
  • मंत्र योग
  • ज्ञान योग
  • नाद योग

हठयोग: हठयोग एक प्राचीनतम प्रणाली है जिसकी मदद से आप अपने स्वास्थ्य को सुधार सकते है, साथ ही इससे आपको मानसिक शांति भी मिलती है| दरहसल इसकी मदद से आप संकल्पशक्ति में वृद्धि कर सकते हैं और अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते है|

ध्यान योग: ध्यान योग के अभ्यास से हमारे शरीर की ऊर्जा को हम केंद्रित कर सकते है| ऊर्जा केंद्रित होने से हमारे मन में शांति मिलती है और शरीर में शक्ति का संचार होता है| ध्यान का अर्थ होता है किसी एक विषय के बारे में सोचना और उसमे अपने मन को एकाग्र करना| ध्यान किसी लक्ष्य को पाने के लिए किया जाता है| वही कुछ लोगो के लिए ध्यान करना ही लक्ष्य होता है|

ध्यान करने के उद्देश्य इस प्रकार है जैसे: मानसिक शांति के लिएअपने मन पर काबू पानामनोबल तथा एकाग्रता बढ़ानासेहत में सुधार आदि|

अष्टांग योग: महर्षि पंतजलि ने आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की क्रिया को आठ भागों में बांट दिया है। यह सभी क्रिया अष्टांग योग के नाम से प्रसिद्ध है। अष्टांग योग अर्थात योग के आठ अंग, अष्टांग योग का महत्व बहुत अधिक है| ध्यान योगा के बारे में और जानने के लिए पढ़े ध्यान की परिभाषा और विधि|

यह आठ अंग हैं:

  • यम
  • नियम
  • आसन
  • प्राणायाम
  • प्रत्याहार
  • धारणा
  • ध्यान
  • समाधि

हम आपको बता दे की उक्त आठ अंगों के अपने-अपने उप अंग भी हैं। वैसे तो वर्तमान में योग के तीन ही अंग प्रचलन में हैं: पहला आसन, दूसरा प्राणायाम और तीसरा ध्यान।