गैस को दूर भगाने के लिए योगासन

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कभी कभी हम अपने आप को ज़रूरत से ज़्यादा खाने की अनुमति दे देते हैं। जिसका नतीजा होता है की हम फूला हुआ या पेट में फुलाव महसूस करते हैं, यह आमतौर पर गैस और एसीडिटी की ही प्रतिक्रिया होती है। इसके बाद इन समस्याओं को दूर करने के लिए हम एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते हैं। पर इनका प्रयोग करने से अच्छा होगा की आप कोई सेहतमंद और प्राकृतिक उपाय आज़माये।

इस आर्टिकल में हमनें कुछ मुख्य योगासनों के बारे में जानकारी दी है जो आपको पेट से संबन्धित समस्याओं को दूर भगाने में मदद देगा पर इन्हें करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है। 15 मिनट किया जाने वाला यह योगासन आपको दर्द से आराम देकर फूलन के एहसास को खत्म करता है। साथ ही यह योग आपके पेट को समान कर किसी भी प्रकार के दर्द से पेट को आराम देता है।

गैस का उपचार के लिए अपनासन

यह मुख्य आसान है जिसका चुनाव लोग पेट में इस तरह की समस्या के दौरान करते हैं। गैस में मुख्य रूप से राहत देने की वजह से ही इसे गैसहारक आसान भी कहा जाता है। पाचन संबंधी अवस्थाओं के अलावा यह पीछे के निचले हिस्से को लचीला बनाए रखता है। इसके अलावा भी यह स्पाइनल ट्विस्ट और बैक बेंड जैसे आसनों में आराम के उद्देश्य से किया जाता है। जब आपका शरीर सुगठित होता है तब यह आपके शरीर की ऊर्जा को फिर से संतुलित कर आपके मन को शांत करता है।

विधि

  • पीठ के बल सीधे लेट जाइए और अपने शरीर को आराम दायक मुद्रा में छोड़ दीजिये।
  • अपने हाथों को घुटनों पर रखकर लंबी सांस लीजिये।
  • अब सांस छोड़ते हुये घुटनों को छाती तक लाइये।
  • घुटनों को एक तरफ से दूसरी तरफ हिलाइए।
  • 5 से 10 मिनट तक साँसे लेने और छोडने का क्रम चलते रहनें दें। अब घुटनों को छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को 3 बार दोहराएँ।

आपके शरीर का लचीलापन यह निर्धारित करता है कि, आप कितना अपने घुटनों को अपने सीने तक पहुंचा पाते हैं। इस कारण आप कई तरह के स्ट्रेच एक ही समय में कर सकते हैं। इस क्रम में जब आप अपना बायां पैर सीधा करते हैं तो आपका दाहिना घुटना ऊपर आ जाता है। अब 5 से 10 बार साँसे लेते हुये इसी अवस्था में रहें और इसे करने के बाद आप पैर के लिए कोई अन्य आसान कर सकते हैं।

सेतुबंध सर्वांगासन

यह आसान आपके शरीर को ऊपर की तरफ उठाए रखता है। यह आपके शरीर में रक्त के संचार को तेज़ कर एनर्जी को बढ़ाता है। और इसके साथ ही शरीर में फंसी गैस को बाहर निकालता है। यह तनाव को कम करने वाले आसन के नाम से भी जाना जाता है। जब बॉडी के अन्य कई अंगों में खुचाव के साथ शक्ति का समावेश हो रहा होता है तब यह आसान मुख्य नर्वस सिस्टम को कंट्रोल करता है। यह महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी लक्षणों में सुधार कर मासिक धर्म चक्र को नियमित और सुचारु रखता है। इन सबके साथ यह सिर तथा कमर के दर्द को कम करने में सहयोगी होता है।

विधि 

  • पीठ के बल लेट जाइए और अपने घुटने मोड़ लीजिये।
  • अपनी भुजाओं को ज़मीन पर रखिए और पैरों को ज़मीन पर टीका दीजिये।
  • अपने कूल्हों को ऊपर की ओर ले जाइए जिससे आपके सीने को तनाव मिले।
  • अब इस अवस्था में 5 बार लंबी साँसे लीजिये और छोड़िए।

जब आप कूल्हों को मोढ़ते हैं तो यह आसन आपके पाचन में मदद करता है। जब आप अपने पिछले हिस्से को ऊपर की ओर मोड़ते हैं तब अपने हाथों को नीचे रखिए। आप अपने दोनों हाथों को एक दूसरे से जोड़कर उँगलियाँ आपस में फंसा भी सकते हैं।

पश्चिमोत्तनासन 

यह भी एक आसान स्ट्रेच (stretch) है जो आपके पेट में फुलाव के एहसास को राहत देता है। साथ ही अचानक होने वाले तनाव और चिंता को भी कम करता है। यह आपके दिमाग को शांति देता है और पिछले अंगो को लचीला बनाता है। कब्ज़ की शिकायत को दूर कर पाचन को नियमित और सुचारु करता है। कुछ लोगों में इसकी मदद से कद को बढ़ाया जा सकता है पर यह इस आसन के नियमित अभ्यास से ही होता है। अगर आप अपने पेट को टोन कर सही आकार में लाना चाहते हैं तो यह आसन आपके लिए सबसे बेहतर है।

विधि 

  • नीचे ज़मीन पर पैरों को सामने की ओर रखकर बैठ जाएँ।
  • अपनी पीठ को एकदम सीधा रखें और अब अपने पैर के अंगूठे को हाथों से छूने की कोशिश करें।
  • यह प्रक्रिया आपके कमर के निचले अंगों को ऊपर की ओर खिचाव देता है।
  • इसी अवस्था में 5 से 10 बार सांस लीजिये।

जब आप हाथों से पैरों को छूने की कोशिश करते हैं तो कोशिश कीजिये की ज़्यादा से ज़्यादा तनाव हो। अगर आप पैरों को नहीं छू पा रहें हों तो कोई बात नहीं, इसका अभ्यास करते रहिए, यह आसन आपके शरीर को स्वस्थ रखता है।

मर्जर्यासन और बिटिलासन 

यहाँ दो आसन हैं जिसे एक के बाद एक बारी बारी से करना है। जहां दोनों आसन के बीच के समय में मेरुदंड (spine) को ऊर्जा और पीठ तथा गर्दन को आराम दिया जाता है। इसमें बिल्ली की तरह के आकार के द्वारा पेट के सभी हिस्सों को ताकत मिलती है और शरीर अंदर से मजबूत होता है। इससे मेरुदंड लचीला होता है साथ ही शरीर में रक्त का प्रवाह सही बना रहता है। गाय के समान आकार से गर्दन और पीठ पर खिंचाव पड़ता है। इस आसन से शरीर का पिछला हिस्सा मजबूत होता है।

विधि 

  • अपने हाथ और घुटने जमीन पर टीका दें ताकि आपकी पीठ बिल्कुल समतल हो सके।
  • लंबी साँसे लें और महसूस करें की आपकी मांसपेशियाँ भी साँसे ले रही हैं।
  • अपने सिर को नीचे करते हुये साँसे बाहर छोड़ें।
    जब आप सांस भीतर लेते हैं तो अपनी पीठ पर दबाव डालिए और सिर तथा नितंब ऊपर की तरफ ले जाइए। इसे काऊ पोज़ (cow pose) कहते हैं।

इन दोनों ही आसनों को बारी बारी से कीजिये। जब आप सांस लेते हैं तब आप बिटिलासन में होते हैं। इस आसन को 5 से 10 बार दोहराइए।

एसिडिटी के उपाय बालासन से 

बालासन एक आरामदायक मुद्रा है जिसे शरीर को आराम देने के लिए किया जाता है। इसे केवल 5 से 10 बार साँसे लेने तक किया जा सकता है और यह आसन करने में बहुत ही आसान व सरल है। यह कंधो, सीने और पीठ से तनाव को बाहर करता है। इसे अक्सर थकान को दूर करने के लिए आज़माया जाता है। मस्तिष्क को शांति का एहसास देने के लिए यह एक अच्छा आसन है। आपकी रीढ़ को सीधा और हल्का कर रक्त के प्रवाह को ठीक करता है।

विधि 

  • घुटनों के बल इस प्रकार बैठे की पैर फैले हुये हों ताकि इनके बीच पर्याप्त जगह बन सके।
  • अब लेट जाइए और अपने बाजू को सामने की ओर सीधा कर खिचीए।
  • ध्यान रहे की आपकी कमर बिल्कुल सीधी और माथा ज़मीन पर टिका हुआ होना चाहिए।
  • अगर आप इस आसन को थोड़ा सरल बनाना चाहते हैं तो सिर के नीचे एक तकिया रख सकते हैं।

इस आसन के लगातार अभ्यास से आपका शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। यह शरीर हमारा है और इसे स्वस्थ रखना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। लगातार नियमित योगासन कीजिये ताकि अगली बार आप अगर ज़्यादा भी खा लें तो आपको किसी प्रकार की चिंता ना हो। नियमित अभ्यास से हमारा शरीर लचीला (Flexible) होता है और इसके साथ ही हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।