कैंब्रिज में छात्रों को ‘जीनियस’ कहने पर रोक, बताया ‘लिंगभेदी’ शब्द

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रचेल पेल्स । कैंब्रिज विश्वविद्यालय में ब्रिटिश हिस्ट्री विभाग की प्रोफेसर लूसी डेलप ने बताया कि यहां इतिहास के प्राध्यापकों को छात्रों की काफी जांचते समय ‘फ्लेयर’, ‘ब्रिलियंस’ और ‘जीनियस’ जैसे शब्दों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी गई है।उन्होंने बताया कि ऐसा इस लिए किया गया है क्योंकि ये शब्द पुरुषों से संबधित हैं। इस लिए इतिहास के अध्यापकों को इन शब्दों को इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। इनसे ऐसा लगता है कि ‘लिंगभेद’ किया जा रहा है।

उन्होंने बताया, इन कुछ शब्दों में खासतौर पर ‘जीनियस’ का पुराना बौद्धिक इतिहास रहा है जहां काफी समय तक इनका प्रयोग केवल पुरुषों की विशेषताओं को बताने के लिए किया गया है। डेलप ने बताया कि ऑक्सफर्ड और कैंब्रिज से महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का अधिक संख्या में फर्स्ट क्लास डिग्री लिए जाने का एक कारण यह भी रहा है कि यहां महिलाओं को ‘पुरुष वर्चस्ववादी माहौल’ का सामना करना पड़ता है। लूसी ने उदाहरण के तौर पर बताया कि विश्वविद्यालय में अधिकांश पुरुष लेखकों की किताबें ही पढ़ाई जाती हैं।

कॉलेज के चित्रों के संग्रह में भी उतनी विभिन्नता नहीं है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में जेंडर ईक्वॉलिटी को बढ़ावा दिए जाने पर चर्चा करते हुए डेलप ने कहा कि उनका विभाग जानता है कि ऐसे शब्दों का ही प्रयोग किया जाए जो अधिक ‘स्पष्ट’ हों। उन्होंने कहा कि हम अपने इतिहास की डिग्री के पहले दो साल के पाठय़प्रम को दोबारा लिख रहे हैं, ताकि छात्रों को अधिक चयन के अवसर उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही मूल्यांकन के मापदंडों को भी स्पष्ट किया जा रहा है।

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