काजल से कम हो सकती है आंखों की रोशनी

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काजल से भरी आंखों को लेकर महिलाओं में खासा आकर्षण रहता है। इससे आंखें बहुत ही खूबसूरत भी लगती हैं लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हद से ज्यादा आंखों का मेकअप रोशनी को प्रभावित कर सकता है।
एक अध्ययन के मुताबिक, ज्यादा आई मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में से 40 प्रतिशत को आंखों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। काजल का आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि, आंखों के ऑयल ग्लैंड्स को ब्लॉक कर देता है। काजल या फिर आई लाइनर हमारे मेबोमियन ग्लैंड्स को ब्लॉक कर देता है। जिससे आईलिड यानी पलकों पर गांठें बन जाती हैं।

हालांकि इनकी वजह से दर्द नहीं होता लेकिन यह हमारे विजन यानी देखने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। मेबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन को ड्राई आई सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। अगर इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता तो स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। इससे ब्लेफरिटिस यानी धुंधला दिखने की समस्या हो सकती है। मेबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन या एमजीडी के मामलों की वजह अभी तक बढ़ती को माना जाता रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं है और अब यह समस्या कम उम्र की महिलाओं को भी हो रही है।

डॉक्टरों के मुताबिक, आईलाइनर और आंखों पर किया जाने वाला दूसरा कोई भी मेकअप मेबोमियन ग्लैंड्स को ब्लॉक कर देता है। ग्लैंड्स के ब्लॉक हो जाने पर ये ऑयल पैदा नहीं कर पातीं। कभी-कभी ऑयल गाढ़ा हो जाता जिससे गांठें बन जाती हैं। एमजीडी ड्राई आई सिंड्रोम, ब्लेफैरिटिस और आंखों की रोशनी चले जाने समस्याओं की मुख्य वजह है।
आंखों में ऐसे 40 ग्लैंड मौजूद होते हैं, जो ऑयल पैदा करते हैं, यही ऑयल आंसुओं के रूप में हमारी आंखों से निकलता है और नमी को बनाए रखता है। आईलाइनर और मस्कारा जैसे प्रोडक्ट्स में पाराबेन और यलो वैक्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ये वाटरप्रूफ रहें। यही केमिकल्स ऑयल को भी ब्लॉक करते हैं और एमजीडी की वजह बनते हैं।