एनीमिया से मुक्ति दिलाए ‘आसन और आहार’

0
64

एनीमिया के रोगी में कमजोरी तथा उदासी के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं। इसलिए उन्हें कठिन तथा अधिक मात्र में आसनों के अभ्यास की सलाह नहीं दी जाती है। इस स्थिति में प्रारम्भ में सूर्य नमस्कार के एक या दो चक्र, वज्रासन, पवनमुक्तासन, मर्करासन, तितली आसन, गोमुख आसन, मण्डूक आसन आदि का ही अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करना चाहिए। जैसे-जैसे स्थिति में सुधार होता जाए, अभ्यास में धीरे-धीरे धनुरासन, भुंजगासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन जैसे कठिन आसनों को जोड़ा जा सकता है।

तितली आसन की अभ्यास विधि

दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए। फिर, दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर इनके तलवों को आपस में सामने की ओर इस प्रकार सटाइए कि एडिय़ां जननेन्द्रिय के पास में या नीचे आ जायें। दोनों हाथों से पैरों के पंजों को दृढ़तापूर्वक पकड़कर घुटनों को जमीन से ऊपर उठाइए और नीचे कीजिए। यह क्रिया सुविधानुसार 25 से 50 बार कीजिए। फिर वापस पूर्व स्थिति में आइए।

प्राणायाम

एनीमिया के रोगी के लिए सरल कपालभाति के साथ नाड़ीशोधन तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अभ्यास से शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मानसिक शांति तथा एकाग्रता भी प्राप्त होती है।

भ्रामरी प्राणायाम की अभ्यास विधि

ध्यान के किसी भी आसन में रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। एक दीर्घ श्वास अंदर लेकर कानों को हाथ के अंगूठे या किसी भी अंगुली से सहजता के साथ बंद कर लें। अब नाक या गले से भौंरे जैसी आवाज निकालें। आवाज निकालते समय प्रश्वास नियंत्रित ढंग से बाहर निकलने दें। यह भ्रामरी प्राणायाम की एक आवृत्ति है। इसकी दस-पन्द्रह आवृत्तियों का अभ्यास करें।

अन्य उपाय

रोज सुबह-शाम टहलने जाएं। प्रात:काल नंगे बदन धूप में बैठें। नियमित रूप से सारे शरीर की मालिश करें। ठंडे पानी से स्नान करें और तौलिये से बदन को इस प्रकार रगड़ें कि त्वचा हल्की लाल हो जाए। प्रतिदिन योगनिद्रा एवं ध्यान करें। नींद भी भरपूर और नियंत्रित होकर लें। मानसिक तनाव और चिंता को विवेक द्वारा दूर करें।

आहार  गेहूं, चना, मोठ, मूंग को अंकुरित कर नींबू मिलाकर सुबह नाश्ते में खाएं। मूंगफली के दाने गुड़ के साथ चबा-चबा कर खाएं। पालक, सरसों, बथुआ, मटर, मेथी, हरा धनिया, पुदीना तथा टमाटर खाएं। फलों में पपीता, अंगूर, अमरूद, केला, सेब, चीकू, नींबू का सेवन करें। अनाज, दालें, मुनक्का, किसमिस, गाजर तथा पिंड खजूर दूध के साथ लें।

महत्त्वपूर्ण सुचना: यहाँ दी गई जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हरसम्भव प्रयास किया गया है। यहाँ उपलब्ध सभी लेख पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए है और इसकीनैतिक जि़म्मेदारी www.braahmi.com  की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपनेचिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। आपका चिकित्सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here