एचसीजी हॉर्मोन के कम होने से रहता है गर्भपात का खतरा 

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मां बनना एक ऐसा सुखद अहसास है, जो कई कठिनाइयों से घिरा रहता है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी रक्त की जांच ईजाद करने का दावा किया है जिसके जरिये यह पता किया जा सकता है कि गर्भवती महिला में गर्भपात का कितना खतरा है।
विशेषज्ञों ने मूल रूप से यह टेस्ट आईपीएफ प्रक्रिया का सहारा लेने वाली महिलाओं के लिए विकसित किया था, मगर उनका कहना है कि इसे प्राकृतिक रूप से गर्भवती महिलाएं भी कर सकती हैं। इस जांच से महिला की गर्भावस्था की स्थिति का पता करने के साथ ही गर्भपात के खतरों के बारे में भी पता किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने आईवीएफ तकनीक से गर्भवती होने वाली दो हजार महिलाओं के हॉर्मोन का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि जिन महिलाओं में एचसीजी हॉर्मोन का कम स्तर था, उनमें गर्भपात का खतरा अधिक था।

एचसीजी हॉर्मोन की कमी से गर्भपात का खतरा
विशेषज्ञों ने पाया कि जिन महिलाओं के रक्त में एचसीजी हॉर्मोन का स्तर प्रति लीटर 30 यूनिट से कम था उनमें गर्भ के आठ हफ्तों तक पहुंचने की गुंजाइश दो फीसदी थी। इसी तरह जिन महिलाओं के रक्त में इस हॉर्मोन की दर 70 यूनिट प्रति लीटर थी, उनके गर्भ के सुरक्षित रहने की संभावना 86 फीसदी से अधिक पाई गई। एचसीजी हॉर्मोन का स्तर जानने के बाद जोड़ों को संभावित खतरों के बारे में पहले से आगाह किया जा सकता है। इससे उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत करने में मदद मिल सकती है।