इन बीजो को फालतू समझ कर ना फेंके, ये कैंसर रोगियों के लिए ये अमृत से कम नहीं है.

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विश्व में कैंसर आज एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या हो गयी है। कैंसर विश्व में होने वाली 12% मौतों के लिए जिम्मेदार है।.कैंसर के ईलाज के लिए कई प्रकार की आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध है,जिनमे मुख्य है कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी लेकिन इन आधुनिक पद्तियो से पूर्ण रूप से कैंसर का ईलाज नहीं हो पता है और इनके साइड इफेक्ट्स भी बहुत ज्यादा होते है. इसलिए हम पौधों से प्राप्त प्राकर्तिक रसायनों से कैंसर का जो ईलाज करते है ,उनके परिणाम बहुत ही अच्छे मिलते है. इसे कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज हम Only Ayurved में एक और कैंसररोधी नेचुरल ईलाज के बारे में बात करेंगे .

आज हम कद्दू के बीज के बारे में चर्चा करेंगे की ये कैंसर में किस प्रकार काम करते है और इन्हें कैसे इस्तेमाल किया जाये। हाल ही में हुए शोधो से पता लगा है कि Pimpkin में इतने अच्छे गुण पाए जाते है क़ि ये एक बहुत अच्छा केमोथेरेपी ईलाज़ में विकल्प बन सकता है।

कद्दू के बीज को हम अक्सर बेकार समझ कर फेक देते है, लेकिन ये बीज हमे कैंसर जैसे रोगों से बचा सकते है. शोध से पता लगा है की कद्दू के बीजो में Cucurbitacin नामक रसायन पाए जाते है, जो कैंसर कोशिका की प्रगति को रोककर कैंसर कोशिका को खत्म कर सकते है. Cucurbitacin मुख्यता कैंसर कोशिकाओ के जीन में परिवर्तन करके Apoptotic Effect (कैंसर कोशिका के मृत्यु ) दिखाते है.इसके इलावा Pumkin seed एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्त्रोत है जो कैंसर से बचने में भी उपयोगी है .

कैंसर रोगी कद्दू के बीजो ताजा या को हल्का भूनकर  कर खा सकते है इसके लिए

कद्दू के बीजो को निकाल कर अच्छी तरह पानी से साफ कर ले .

इन बीजो को किसी अख़बार पर या कपडे पर अच्छी तरह सुखा ले.

अब आप किसी कटोरे में कद्दू के बीज को घी /मखन /तेल और नमक, मिर्ची,गर्म मसाले के साथ मिक्स करे

अब इस mixture को कड़ी में डालकर हल्का भूने जब तक बीज सुनहरे रंग के न हो जाये.

जब ये सुनहरे और कुरकुरे हो जाये तो इनको उतार कर ठंडा कर ले .

ठण्डा करने के बाद आप इसमें निम्बू का रस भी डाल सकते है.

फिर इन कुरकुरे बीजो का कैंसर रोगी कम से कम 10 – 10 ग्राम सेवन करे

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