आयुर्वेदिक औषधि गिलोय के 10 फायदे

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क्या होता है गिलोय

गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका वनस्पतिक नाम Tinospora Cordifolia है तथा संस्कृत में इसे गुडूची,अमृता जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। यह एक लता या बेल होती है जो की पेड़ों, दीवारों तथा गमले आदि में लगाने के बाद रस्सी के सहारे आसानी से ऊपर चढ़ जाती है यह पेड़ों पर चढ़ी हुई अक्सर पार्कों में दिखाई देती है। गिलोय जिस पेड़ को आधार बनाती है उसके गुण भी इसमें समाहित हो जाते हैं। जैसे कि नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय में नीम के गुण आ जाते हैं।

गिलोय के फायदे

1 आधुनिक विज्ञान की अनेक शोधों में भी यह साबित हो गया है की गिलोय बीमारियों से बचाने तथा चिकित्सा दोनों ही रूप में बहुत उपयोगी है। Researchers के अनुसार गिलोय में anti inflammatory, analgesic, antipyretic तथा immune booster जैसे अनेक गुण पाए जाते हैं।

2  चिकनगुनिया जैसे वायरल बुखार जो ठीक होने के बाद भी रोगी को महीनों तक जोड़ों के दर्द से परेशान करते रहते हैं, ऐसे मामलों में गिलोय प्रकृति द्वारा हमें दिया गया एक बेहतरीन उपहार है आयुर्वेद में तो गिलोय को अनेक बीमारियों में उपयोगी माना ही गया है।

3  गिलोय सभी प्रकार के बुखार में फायदेमंद होती है। विशेष रूप से डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू से बचाव, चिकित्सा तथा रोग होने के बाद side effects को दूर करने में अति उपयोगी है तथा सर्दी, खांसी,जुकाम में भी फायदेमंद है। ज्वर निवारण के अतिरिक्त किसी भी लंबी व्याधि के बाद हुई दुर्बलता को मिटाने के लिए भी रसायन के तौर पर गिलोय प्रयुक्त होती है। सभी प्रकार के जीर्ण ज्वरों को दूर करने में गिलोय बहुत फायदेमंद है।

4  गिलोय एक रसायन के रूप में काम करती है। यह शरीर में जाकर खून को साफ़ करती है।

5 गिलोय हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाती है।

6 गिलोय कोलेस्ट्रोल को कम करती है तथा खून में शूगर के नियंत्रण में सहायता करती है।

7  गिलोय के नित्य प्रयोग से चेहरे पर तेज आता है और असमय ही झुर्रियां नहीं पड़ती।

8  गिलोय त्रिदोशघ्न है अर्थात किसी भी प्रकृति के लोग इसे ले सकते हैं।

9  गिलोय पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में सहायक है और इसके सेवन से अंत सम्बन्धी समस्याएं दूर होती हैं\

.10 गिलोय अपनी anti-inflammatory और anti-arthritic properties के कारण गठिया में भी फायदेमंद है\

गिलोय का घरेलू प्रयोग कैसे करें?

1 ज्वर या बुखार होने पर: 4-5 इंच गिलोय के टुकड़े के साथ एक चम्मच धनिया तथा एक टुकड़ा नीम की छाल का आंतरिक भाग मिला कर काढ़ा बना कर लेना बुखार में फायदेमंद है या गिलोय का 4-5 इंच टुकड़ा लेकर उसके साथ 2-3 तुलसी के पत्ते तथा इतनी ही कालीमिर्च लेकर काढ़ा बना कर पीना भी बुखार में फायदेमंद है अथवा केवल गिलोय का काढ़ा बनाकर पीना भी बुखार में आराम देता है स्वाद के लिए इसमें शहद,गुड अथवा चीनी डाल सकते हैं।

2  डेंगू बुखार में: Platelets कम होने पर गिलोय के रस के साथ, aloevera juice,अनार का juice तथा पपीते की पत्तियों का रस मिलाकर लेना फायदेमंद माना जाता है।

3 मधुमेह या diabetes में: गिलोय का रस कुछ समय तक लगातार दिन में 2 बार लेना मधुमेह में फायदेमंद है।

4  जोड़ों के दर्द में: गिलोय का काढ़ा बनाकर उसमें 10-20 ml अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

5 रक्त विकार होने पर: खाज, खुजली जैसे चर्म रोगों में शुद्ध गुगुल के साथ देने से लाभ होता है।

6  कब्ज होने पर: गिलोय का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करना कब्ज को दूर करता है।

7 मूत्र विकारों में: गिलोय का काढ़ा पेशाब संबंधी परेशानियों को दूर करने में भी फायदेमंद माना गया है।