आपके रव्तदान से मिल सकता है किसी को जीवनदान

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-रव्तदान से कम नही होता खून | -मात्र 48घंटे में होती है क्षतिपूर्ति | नई दिल्ली । रव्तदान एक महादान है आपके द्वारा दिये गये रव्त से किसी को नई जिंदगी मिल सकती है। दुनियाभर में हजारों लोगों की मौत उन्हें समय पर रव्त नहीं मिल पाने की वजह से हो जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि रव्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं है। इसे लेकर लोगों के बीच कई प्रकार के भ्रम भी फैले हैं। इन्हीं भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए हर साल 14 जून को विश्व रव्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हालांकि, लोगों में रव्तदान को लेकर जागरुकता तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई लोग कुछ मिथक या भ्रम के कारण खून देने में कतराते हैं। जानते हैं रव्तदान से जुड़े ये मिथक क्या हैं, रव्तदान किसे करना चाहिए और इस दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ लोगों को भ्रम है कि रव्तदान करने के बाद शरीर में खून की कमी हो जाएगी। यह पूरी तरह गलत धारणा है। रव्तदान के 48 घंटे बाद रव्त की क्षतिपूर्ति हो जाती है। इतना ही नहीं, यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो हर तीन महीने में एक बार रव्तदान कर सकते हैं। रव्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। इससे रव्त दान करने वाले की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। रव्तदान से दिल की बीमारियों की आशंका कम करने में सहायता होती है। शरीर में अतिरिव्त आयरन को जमने से रोकता है।

रव्तदान के बारे में कुछ लोग मानते हैं कि यह दर्दनाक प्रप्रिया है, लेकिन यह गलत है। सुई चुभोने का एहसास होता है और रव्त निकलने में कोई परेशानी नहीं होती है। यदि रव्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डाइस्टोलिक तक है तो आप रव्तदान कर सकते हैं। बीपी की गोलियां खाने से रव्तदान का कोई संबंध नहीं है। सर्दी, जुकाम, पेट खराब होने या अन्य किसी बीमारी के दौरान रव्तदान न करें। एंटीबायोटिक लेने पर भी रव्तदान से बचें। व्रत या रोजे में नहीं कर सकते दानŠ व्रत या रोजे में भी रव्तदान किया जा सकता है। इससे रोजा नहीं टूटता है। कई बार मौलवी भी यह बात कह चुके हैं। वहीं व्रत में रव्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता। पूरे दिन भूखे रहने के कारण कुछ कमजोरी लग सकती है। ब्लड देने का सबसे बड़ा फायदा डोनर को ही होता है।

दरअसल, रव्त देने से पहले ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी, sपेटाइटिस सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर खून तो नहीं लिया जाता है, लेकिन रव्त दान करने वाले को संभावित बीमारी के बारे में समय पर जानकारी मिल जाती है। वह समय रहते इनका उपचार कर सकता है। वहीं, ब्लड डोनेशन से दिल की बीमारी की आशंका कम होती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है। जितना खून लिया जाता है, उतना 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। वहीं, ब्लड की मात्रा शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरी हो जाती है। ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।

रव्त देने के बाद ज्यादा मात्रा में पानी पीएं। यह शरीर में हुए तरल की कमी पूरा करता है और इसे ब्लड प्रेशर भी सामान्य रहता है। जूस भी ले सकते हैं। वहीं विटामिन्स की कमी को दूर करने के लिए भी कुछ चीजों को खाने में शामिल कर सकते हैं। लाल रव्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए विटामिन बी-2 आवश्यक है और यह ऊर्जा भी देता है। दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली से इसकी पूर्ति होती है। वहीं, नई लाल रव्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए फोलेट या बी-9 की जरूरत होती है। बींस, संतरा, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां इसका अच्छा स्रोत हैं। स्वस्थ रव्त कोशिकाओं व प्रोटीन के लिए विटामिन बी-6 की जरूरत होती है। विटामिन बी-6 की पूर्ति के लिए आलू, केला, नट्स, पालक आदि खाएं।