आग की परछाईं क्यों नहीं दिखायी देती?

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स्कूल के दिनों में हमें यह बताया जाता था कि जिन भी वस्तुओं पर हम रोशनी डालते हैं, वे अपने पीछे परछाईं छोड़ जाती हैं। फिर वह पेंसिल हो या पेन हो, हमारी किताब हो या बैठने वाली कुर्सी हो, या फिर स्वयं हम ही क्यों ना हों।

अगर हम भी जलती रोशनी के पीछे जाकर खड़े हो जाएं, तो अपने पीछे मुड़ने पर हमें अपनी परछाई दिखाई देती है। माचिस की तीली की भी अपनी परछाई होती है, लेकिन जब हम उसे जलाते हैं तो उसकी आग की परछाई क्यों नहीं दिखती।

कभी आप यह आजमा कर देखना, जब हम माचिस जलाते हैं तो उसे जलाते समय उसकी चिंगारी की छोटी सी परछाई तो हमें दिख जाती है लेकिन जलने के बाद उसकी आग की परछाई कभी नहीं दिखती।

इसके पीछे का क्या कारण है? अगर आप मोमबत्ती जलाने के बाद उसे रोशनी में लाएं और दूसरी ओर उसकी परछाई देखने की कोशिश करें तो आपको मोमबत्ती की परछाई तो दिखेगी लेकिन उसकी ‘लौ’ की परछाई नहीं देख पाएंगे।

इसके पीछे विज्ञान ने काफी रोचक जवाब दिया है।

जिसके अनुसार माचिस की या मोमबती की आग स्वयं एक रोशनी है। उसे ही अगर हम रोशनी में ले जाएंगे, तो वह परछाई नहीं बनाती, क्योंकि वे दोनों एक ही प्रकार के तत्व हैं।

अगर आप फिर भी ऐसी रोशनी की परछाई देखना चाहते हैं, तो आपको इस रोशनी को इससे भी तेज रोशनी के नीचे ले जाना होगा। सूर्य की रोशनी से तेज कुछ नहीं होता। अगर आप जलती हुई मोमबत्ती पर सूरज की रोशनी डालें, तो दूसरी ओर दीवार पर या फिर जमीन पर जलती हुई लौ की परछाई देख सकते हैं।

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